Microbes in Human Welfare (मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव) कक्षा 12 जीवविज्ञान का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें बताया गया है कि सूक्ष्मजीव केवल बीमारियाँ ही नहीं फैलाते, बल्कि मानव जीवन, कृषि, खाद्य उत्पादन, औद्योगिक प्रक्रियाओं और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दही बनाने वाले बैक्टीरिया से लेकर एंटीबायोटिक बनाने वाली कवक तक, अनेक सूक्ष्मजीव हमारे दैनिक जीवन को उपयोगी बनाते हैं। Download NCERT BOOK PDF.
इस अध्याय में हम खाद्य पदार्थों के निर्माण, औद्योगिक उत्पादों, सीवेज उपचार, जैव गैस उत्पादन, जैव नियंत्रण और जैव उर्वरकों में सूक्ष्मजीवों के उपयोग का अध्ययन करेंगे। ये विषय बिहार बोर्ड कक्षा 12 की परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन नोट्स में सरल हिंदी भाषा, आवश्यक अंग्रेजी वैज्ञानिक शब्द, उदाहरण और परीक्षा उपयोगी बिंदु दिए गए हैं, ताकि विद्यार्थी अध्याय को आसानी से समझकर दोहरा सकें।
सूक्ष्मजीव क्या हैं? (What are Microbes?)
सूक्ष्मजीव ऐसे जीव होते हैं जिन्हें सामान्यतः नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता। इन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की आवश्यकता होती है। ये मिट्टी, जल, वायु, भोजन और दूसरे जीवों के शरीर में पाए जाते हैं।
सूक्ष्मजीवों के प्रमुख समूह:
- बैक्टीरिया (Bacteria): जैसे Lactobacillus, Rhizobium।
- कवक (Fungi): जैसे Saccharomyces cerevisiae, Penicillium।
- प्रोटोजोआ (Protozoa): जैसे Trichonympha, जो दीमक की आँत में पाया जाता है।
- सूक्ष्म शैवाल (Microscopic algae): कुछ सूक्ष्म शैवाल जल में पाए जाते हैं।
- विषाणु (Viruses): ये कोशिकीय संरचना से रहित संक्रामक इकाइयाँ हैं और केवल जीवित पोषक कोशिका में ही अपना गुणन कर सकते हैं।
मानव कल्याण में इन सूक्ष्मजीवों का उपयोग उनकी जैव-रासायनिक क्रियाओं और विभिन्न पदार्थों के उत्पादन की क्षमता के कारण किया जाता है।
घरेलू खाद्य पदार्थों के निर्माण में सूक्ष्मजीव
हमारे घरों में अनेक खाद्य पदार्थ सूक्ष्मजीवों की सहायता से तैयार किए जाते हैं। इस प्रक्रिया को किण्वन (Fermentation) कहा जाता है, जिसमें सूक्ष्मजीव कुछ पदार्थों को उपयोगी उत्पादों में बदलते हैं।
1. दूध से दही बनना (Formation of Curd)
दूध से दही बनाने में लैक्टिक अम्ल बैक्टीरिया (LAB) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दही के थोड़े से पुराने भाग को गर्म दूध में मिलाने पर बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं और लैक्टोज को लैक्टिक अम्ल में बदलते हैं।
मुख्य बिंदु:
- प्रमुख सूक्ष्मजीव: Lactobacillus।
- लैक्टिक अम्ल दूध के प्रोटीन को जमाने में सहायता करता है।
- LAB दही के स्वाद और बनावट को विकसित करते हैं।
- ये आँतों में कुछ हानिकारक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकने में भी सहायता कर सकते हैं।
- LAB दूध में उपस्थित कैल्शियम के अवशोषण की उपलब्धता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
2. इडली और डोसा का निर्माण
इडली और डोसा बनाने के लिए चावल तथा उड़द दाल के मिश्रण को कुछ समय तक किण्वित किया जाता है। इस प्रक्रिया में प्राकृतिक रूप से उपस्थित बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव योगदान देते हैं।
किण्वन के कारण मिश्रण में गैस बनती है, जिससे वह फूलता है और पकने के बाद मुलायम बनावट प्राप्त करता है। इससे स्वाद तथा पाचन संबंधी गुणों में भी परिवर्तन हो सकता है।
3. ब्रेड बनाने में यीस्ट
ब्रेड बनाने में Saccharomyces cerevisiae नामक यीस्ट का उपयोग किया जाता है। इसे बेकर्स यीस्ट (Baker’s yeast) भी कहते हैं।
यीस्ट आटे में उपस्थित शर्करा का किण्वन करके कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है। यह गैस आटे में फँस जाती है और आटा फूल जाता है। बेकिंग के बाद ब्रेड हल्की तथा छिद्रयुक्त बनती है।
4. पारंपरिक पेय पदार्थ
कुछ पारंपरिक पेय पदार्थों के निर्माण में भी सूक्ष्मजीवों का उपयोग होता है। किण्वन के दौरान सूक्ष्मजीव शर्करा को अन्य पदार्थों में बदलते हैं। अलग-अलग उत्पादों के लिए अलग सूक्ष्मजीव और नियंत्रित परिस्थितियाँ आवश्यक होती हैं।
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औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्मजीवों की भूमिका
कई सूक्ष्मजीवों का उपयोग बड़े स्तर पर औद्योगिक उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है। इन उत्पादों में अल्कोहल, कार्बनिक अम्ल, एंजाइम और औषधीय पदार्थ शामिल हैं। औद्योगिक उत्पादन के लिए सूक्ष्मजीवों को बड़े पात्रों में नियंत्रित परिस्थितियों में उगाया जाता है।
1. औद्योगिक किण्वक (Fermenter)
किण्वक एक बड़ा पात्र होता है जिसमें सूक्ष्मजीवों को उपयुक्त पोषक माध्यम, तापमान, pH और ऑक्सीजन जैसी नियंत्रित परिस्थितियों में विकसित किया जाता है।
किण्वक के प्रमुख कार्य:
- सूक्ष्मजीवों को पोषक पदार्थ उपलब्ध कराना।
- उचित तापमान और pH बनाए रखना।
- आवश्यकतानुसार ऑक्सीजन और मिश्रण उपलब्ध कराना।
- उपयोगी उत्पाद के उत्पादन को बढ़ाना।
2. कार्बनिक अम्लों का उत्पादन
सूक्ष्मजीव कई कार्बनिक अम्लों के औद्योगिक उत्पादन में उपयोगी हैं।
| उत्पाद | सूक्ष्मजीव |
|---|---|
| साइट्रिक अम्ल (Citric acid) | Aspergillus niger |
| एसीटिक अम्ल (Acetic acid) | Acetobacter aceti |
| लैक्टिक अम्ल (Lactic acid) | Lactobacillus |
| ब्यूटिरिक अम्ल (Butyric acid) | Clostridium butylicum |
इन अम्लों का उपयोग खाद्य पदार्थों, औद्योगिक प्रक्रियाओं और विभिन्न रासायनिक उत्पादों में किया जाता है।
3. अल्कोहल उत्पादन
यीस्ट Saccharomyces cerevisiae शर्करा का किण्वन करके एथिल अल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करता है। यह प्रक्रिया पेय पदार्थों तथा औद्योगिक अल्कोहल के उत्पादन में उपयोगी है।
4. एंजाइम और अन्य जैव-सक्रिय अणु
सूक्ष्मजीवों से अनेक एंजाइम और जैव-सक्रिय पदार्थ प्राप्त किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, लाइपेज का उपयोग तेल और चिकनाई हटाने वाले डिटर्जेंट में किया जा सकता है। पेक्टिनेज तथा प्रोटीएज का उपयोग फलों के रस को स्पष्ट करने में किया जाता है।
कुछ सूक्ष्मजीव जैव-सक्रिय अणु भी बनाते हैं, जिनका चिकित्सा और अनुसंधान में उपयोग होता है।
औषधियों के निर्माण में सूक्ष्मजीव
सूक्ष्मजीवों से प्राप्त अनेक पदार्थ चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं। इनमें एंटीबायोटिक्स और कुछ अन्य जैव-सक्रिय यौगिक शामिल हैं।
1. एंटीबायोटिक (Antibiotics)
एंटीबायोटिक ऐसे पदार्थ हैं जो कुछ सूक्ष्मजीवों द्वारा बनाए जाते हैं और अन्य सूक्ष्मजीवों, विशेषकर बैक्टीरिया, की वृद्धि को रोकते हैं या उन्हें नष्ट करते हैं।
पेनिसिलिन (Penicillin) एक प्रसिद्ध एंटीबायोटिक है। इसकी खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1928 में की थी। इसका उत्पादन Penicillium नामक कवक से संबंधित है। बाद में इसके औषधीय उपयोग को विकसित करने में अन्य वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
परीक्षा के लिए याद रखें:
- खोजकर्ता: अलेक्जेंडर फ्लेमिंग।
- खोज का वर्ष: 1928।
- स्रोत: Penicillium कवक।
- उपयोग: संवेदनशील बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों के उपचार में।
एंटीबायोटिक का उपयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। ये वायरल संक्रमणों, जैसे सामान्य सर्दी-जुकाम, के विरुद्ध सीधे प्रभावी नहीं होते।
सीवेज उपचार में सूक्ष्मजीव (Microbes in Sewage Treatment)
घरेलू और नगरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को सीवेज (Sewage) कहते हैं। इसमें कार्बनिक पदार्थ, निलंबित कण तथा विभिन्न सूक्ष्मजीव हो सकते हैं। सीवेज उपचार में सूक्ष्मजीव कार्बनिक प्रदूषकों को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सीवेज उपचार सामान्यतः दो प्रमुख चरणों में समझा जाता है।
1. प्राथमिक उपचार (Primary Treatment)
यह मुख्यतः भौतिक प्रक्रिया है। इसमें छानने और अवसादन (Sedimentation) द्वारा बड़े ठोस पदार्थ तथा निलंबित कणों को अलग किया जाता है।
मुख्य चरण:
- बड़े कचरे को स्क्रीन द्वारा हटाना।
- रेत और छोटे भारी कणों को अलग करना।
- अवसादन टैंक में ठोस पदार्थों को नीचे बैठाना।
- प्राप्त ठोस अवशेष को प्राथमिक कीचड़ (Primary sludge) कहना।
प्राथमिक उपचार के बाद जल में घुले हुए और बारीक कार्बनिक पदार्थ शेष रह सकते हैं, जिन्हें आगे जैविक उपचार से कम किया जाता है।
2. द्वितीयक उपचार (Secondary Treatment)
द्वितीयक उपचार में सूक्ष्मजीवों की सहायता से कार्बनिक पदार्थों का जैविक अपघटन किया जाता है। प्राथमिक उपचार से प्राप्त जल को वातन टैंक में भेजा जाता है, जहाँ हवा प्रवाहित की जाती है।
इससे एरोबिक बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव तेजी से बढ़ते हैं और फ्लॉक्स (Flocs) बनाते हैं। फ्लॉक्स सूक्ष्मजीवों के समूह होते हैं, जिनमें बैक्टीरिया प्रायः कवक के तंतुओं के साथ जुड़े रहते हैं।
ये सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थों को विघटित करते हैं और जल की BOD कम करने में मदद करते हैं।
3. BOD क्या है?
BOD का पूरा नाम Biochemical Oxygen Demand (जैव-रासायनिक ऑक्सीजन माँग) है। यह जल में उपस्थित जैव-विघटनीय कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के लिए सूक्ष्मजीवों द्वारा आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा का माप है।
- अधिक BOD सामान्यतः अधिक जैव-विघटनीय कार्बनिक प्रदूषण को दर्शाती है।
- प्रभावी जैविक उपचार के बाद BOD कम हो जाती है।
- BOD जल की गुणवत्ता के आकलन में उपयोगी संकेतक है।
4. सक्रिय कीचड़ (Activated Sludge)
वातन टैंक में फ्लॉक्स के निर्माण के बाद जल को अवसादन टैंक में भेजा जाता है। वहाँ फ्लॉक्स नीचे बैठ जाते हैं और इन्हें सक्रिय कीचड़ कहा जाता है।
इस सक्रिय कीचड़ का एक भाग वापस वातन टैंक में भेजा जाता है, ताकि सूक्ष्मजीवों की पर्याप्त मात्रा बनी रहे। शेष कीचड़ को अवायवीय कीचड़ पाचक (Anaerobic sludge digester) में भेजा जा सकता है।
इस प्रकार सूक्ष्मजीव सीवेज के कार्बनिक प्रदूषण को कम करने और जल उपचार को प्रभावी बनाने में मदद करते हैं।
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जैव गैस उत्पादन में सूक्ष्मजीव
जैव गैस (Biogas) एक ईंधन गैस मिश्रण है, जिसमें मुख्यतः मीथेन (CH₄) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) होती हैं। इसका निर्माण कार्बनिक पदार्थों के अवायवीय अपघटन से होता है।
1. मीथेन उत्पादक सूक्ष्मजीव (Methanogens)
मीथेन उत्पादक सूक्ष्मजीवों को मीथेनोजेन्स (Methanogens) कहते हैं। ये ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कुछ कार्बनिक पदार्थों के अपघटन से मीथेन बनाने में सहायता करते हैं।
उदाहरण: Methanobacterium।
ये सूक्ष्मजीव पशुओं के रूमेन (Rumen) तथा गोबर से जैव गैस बनाने वाली इकाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
2. जैव गैस संयंत्र का कार्य
- गोबर और अन्य उपयुक्त जैविक अपशिष्ट को पानी के साथ मिलाया जाता है।
- इस मिश्रण को बंद पाचक टैंक में डाला जाता है।
- अवायवीय सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करते हैं।
- मीथेन युक्त गैस एकत्र की जाती है।
- गैस का उपयोग खाना पकाने या उपयुक्त उपकरणों में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है।
लाभ: जैविक कचरे का उपयोग, ईंधन की उपलब्धता और अपशिष्ट प्रबंधन में सहायता। बचा हुआ पचा पदार्थ उचित प्रबंधन के बाद जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
जैव नियंत्रण में सूक्ष्मजीव (Microbes in Biocontrol)
जैव नियंत्रण (Biocontrol) में हानिकारक कीटों और रोग पैदा करने वाले जीवों को नियंत्रित करने के लिए प्राकृतिक शत्रुओं या जैविक एजेंटों का उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण के अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना है।
1. बैसिलस थुरिंजिएन्सिस (Bacillus thuringiensis)
Bacillus thuringiensis (Bt) एक बैक्टीरिया है जो कुछ कीटों के लार्वा के विरुद्ध प्रभावी विष-प्रोटीन बनाता है। Bt आधारित जैव-कीटनाशकों का उपयोग कुछ फसल-हानिकारक कीटों के नियंत्रण में किया जाता है।
2. ट्राइकोडर्मा (Trichoderma)
Trichoderma कवक की कुछ प्रजातियाँ पौधों में रोग उत्पन्न करने वाले दूसरे कवकों को नियंत्रित करने में उपयोगी होती हैं। इनका उपयोग जैव नियंत्रण एजेंट के रूप में किया जा सकता है।
3. बैकुलोवायरस (Baculoviruses)
बैकुलोवायरस की कुछ प्रजातियाँ विशेष कीटों को संक्रमित करती हैं। इनकी मेजबान-विशिष्टता के कारण इन्हें समेकित कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management) में उपयोगी माना जाता है।
जैव नियंत्रण के लाभ:
- रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग को कम करने में मदद।
- कुछ लाभकारी जीवों पर कम दुष्प्रभाव।
- पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा।
- कीट प्रबंधन के समेकित तरीकों में उपयोगिता।
जैव उर्वरकों में सूक्ष्मजीव (Microbes as Biofertilisers)
जैव उर्वरक (Biofertilisers) ऐसे जीवित सूक्ष्मजीव या जैविक एजेंट होते हैं जो पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने में सहायता करते हैं। ये मिट्टी की उर्वरता और पोषक तत्वों के चक्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
1. राइजोबियम (Rhizobium)
Rhizobium दलहनी पौधों की जड़ों में ग्रंथियाँ (Root nodules) बनाता है। यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों द्वारा उपयोग किए जा सकने वाले रूपों में बदलने में सहायता करता है। इस प्रक्रिया को जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Biological Nitrogen Fixation) कहते हैं।
2. एजोटोबैक्टर (Azotobacter)
Azotobacter एक स्वतंत्र रूप से रहने वाला नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला बैक्टीरिया है। यह मिट्टी में पाया जाता है और कुछ परिस्थितियों में पौधों के लिए नाइट्रोजन उपलब्ध कराने में योगदान देता है।
3. सायनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria)
सायनोबैक्टीरिया प्रकाश संश्लेषण करने वाले सूक्ष्मजीव हैं। Anabaena और Nostoc जैसे उदाहरण जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण में योगदान दे सकते हैं। धान के खेतों में इनका उपयोग जैव उर्वरक के रूप में उपयोगी हो सकता है।
4. माइकोराइजा (Mycorrhiza)
माइकोराइजा पौधों की जड़ों और कुछ कवकों के बीच सहजीवी संबंध है। Glomus इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
माइकोराइजा के लाभ:
- मिट्टी से फॉस्फोरस के अवशोषण में सहायता।
- पौधों की वृद्धि में योगदान।
- कुछ पौधों की सूखा सहन करने की क्षमता में सुधार।
- कुछ रोगजनकों के प्रति प्रतिरोध में सहायता।
जैव उर्वरक मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं।
महत्वपूर्ण सूक्ष्मजीव और उनके उपयोग
| सूक्ष्मजीव | उपयोग |
|---|---|
| Lactobacillus | दूध से दही बनाने में |
| Saccharomyces cerevisiae | ब्रेड तथा अल्कोहल उत्पादन |
| Aspergillus niger | साइट्रिक अम्ल उत्पादन |
| Acetobacter aceti | एसीटिक अम्ल उत्पादन |
| Penicillium | पेनिसिलिन से संबंधित उत्पादन |
| Methanobacterium | जैव गैस उत्पादन में मीथेन निर्माण |
| Rhizobium | दलहनी पौधों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण |
| Nostoc | जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण |
| Glomus | माइकोराइजा और फॉस्फोरस अवशोषण |
| Trichoderma | जैव नियंत्रण |
| Bacillus thuringiensis | कुछ कीटों का जैविक नियंत्रण |
अध्याय के महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्द
1. Fermentation (किण्वन): सूक्ष्मजीवों द्वारा शर्करा जैसे पदार्थों को अन्य उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया।
2. Antibiotics (एंटीबायोटिक्स): ऐसे पदार्थ जो संवेदनशील सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकते हैं या उन्हें नष्ट करते हैं।
3. BOD: जैव-विघटनीय कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की माँग का माप।
4. Flocs (फ्लॉक्स): सीवेज उपचार में सूक्ष्मजीवों के समूह, जो कार्बनिक पदार्थों के अपघटन में सहायता करते हैं।
5. Activated Sludge (सक्रिय कीचड़): द्वितीयक उपचार के बाद अवसादन टैंक में बैठने वाला सूक्ष्मजीव-समृद्ध पदार्थ।
6. Methanogens (मीथेनोजेन्स): ऐसे सूक्ष्मजीव जो अवायवीय परिस्थितियों में मीथेन बनाने में सहायता करते हैं।
7. Biofertilisers (जैव उर्वरक): पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करने वाले जीवित जैविक एजेंट।
8. Biocontrol (जैव नियंत्रण): कीटों और रोगजनकों को नियंत्रित करने के लिए जैविक एजेंटों का उपयोग।
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परीक्षा से पहले निम्नलिखित बिंदुओं का विशेष रूप से अभ्यास करें:
- दही बनाने में LAB यानी लैक्टिक अम्ल बैक्टीरिया की भूमिका।
- ब्रेड बनाने में Saccharomyces cerevisiae का उपयोग।
- पेनिसिलिन की खोज और उसके स्रोत से संबंधित तथ्य।
- सीवेज के प्राथमिक तथा द्वितीयक उपचार में अंतर।
- BOD का पूरा नाम और जल प्रदूषण से संबंध।
- सक्रिय कीचड़ और फ्लॉक्स का निर्माण।
- मीथेनोजेन्स तथा जैव गैस उत्पादन।
- Bt, Trichoderma और बैकुलोवायरस के उपयोग।
- Rhizobium, सायनोबैक्टीरिया तथा माइकोराइजा की भूमिका।
- जैव उर्वरकों और रासायनिक उर्वरकों में अंतर।
उत्तर लिखने की सलाह: दो या तीन अंकों के प्रश्नों में परिभाषा के साथ एक उदाहरण अवश्य लिखें। पाँच अंकों के प्रश्नों में प्रक्रिया को क्रमवार समझाएँ और जहाँ उपयुक्त हो, चित्र या फ्लोचार्ट बनाएँ।
निष्कर्ष (Conclusion)
Microbes in Human Welfare अध्याय यह स्पष्ट करता है कि सूक्ष्मजीव मानव जीवन और पर्यावरण के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इनका उपयोग खाद्य पदार्थों, औषधियों, औद्योगिक उत्पादों, सीवेज उपचार, जैव गैस, जैव नियंत्रण और जैव उर्वरकों के निर्माण में होता है। सूक्ष्मजीवों की इन उपयोगी भूमिकाओं को समझना जीवविज्ञान की पढ़ाई के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के लिए भी आवश्यक है।
Bihar Board Class 12 Biology 2027 की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को परिभाषाओं, सूक्ष्मजीवों के नाम, उनके उपयोग और सीवेज उपचार की प्रक्रिया का नियमित पुनरावर्तन करना चाहिए। इन बिंदुओं की अच्छी समझ से वस्तुनिष्ठ और वर्णनात्मक दोनों प्रकार के प्रश्नों की तैयारी बेहतर की जा सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. Microbes in Human Welfare क्या है?
यह कक्षा 12 जीवविज्ञान का अध्याय है, जिसमें खाद्य पदार्थों, औषधियों, कृषि, जैव गैस और सीवेज उपचार में सूक्ष्मजीवों के उपयोग का अध्ययन किया जाता है।
2. दही बनाने में कौन-सा सूक्ष्मजीव उपयोगी है?
लैक्टिक अम्ल बैक्टीरिया (LAB), विशेषकर Lactobacillus, दूध को दही में बदलने में सहायता करता है।
3. BOD का पूरा नाम क्या है?
BOD का पूरा नाम Biochemical Oxygen Demand है। यह जल में जैव-विघटनीय कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की माँग का संकेतक है।
4. जैव गैस उत्पादन में कौन-से सूक्ष्मजीव सहायक हैं?
मीथेनोजेन्स, जैसे Methanobacterium, अवायवीय परिस्थितियों में मीथेन उत्पादन में सहायता करते हैं।
5. जैव उर्वरक के दो उदाहरण दीजिए।
Rhizobium और Nostoc जैव उर्वरक के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
6. जैव नियंत्रण में Bt का क्या उपयोग है?
Bacillus thuringiensis का उपयोग कुछ हानिकारक कीटों के नियंत्रण के लिए जैविक एजेंट के रूप में किया जाता है।
