Class 12 Biology Notes in Hindi | Bihar Board 2027
कक्षा 12 जीव विज्ञान के अध्याय Biotechnology and its Applications (जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके अनुप्रयोग) के ये नोट्स बिहार बोर्ड परीक्षा 2027 की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए सरल हिंदी में तैयार किए गए हैं। इनमें NCERT आधारित परिभाषाएँ, महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्य, उदाहरण, उपयोग, अंतर, परीक्षा उपयोगी प्रश्न और त्वरित पुनरावृत्ति शामिल हैं। Download NCERT BOOK PDF.
इस अध्याय में क्या पढ़ेंगे?
- जैव प्रौद्योगिकी के प्रमुख अनुप्रयोग
- कृषि में जैव प्रौद्योगिकी और Bt कपास
- RNA interference (RNAi)
- चिकित्सा में जैव प्रौद्योगिकी
- इंसुलिन, जीन चिकित्सा और आणविक निदान
- ट्रांसजेनिक पशु तथा जैव सुरक्षा
- महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर और MCQs
जैव प्रौद्योगिकी क्या है? (What is Biotechnology?)
जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) वह तकनीक है जिसमें जीवों, कोशिकाओं, एंजाइमों या जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग करके मानव के लिए उपयोगी उत्पाद और सेवाएँ विकसित की जाती हैं।
आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी में DNA तथा जीन में परिवर्तन करके उपयोगी गुण प्राप्त किए जा सकते हैं। इसका उपयोग कृषि, चिकित्सा, उद्योग और पर्यावरण संरक्षण में होता है।
जैव प्रौद्योगिकी के प्रमुख अनुप्रयोग
- कृषि (Agriculture): कीट-प्रतिरोधी तथा उपयोगी गुणों वाली फसलें विकसित करना।
- चिकित्सा (Medicine): इंसुलिन, टीके और अन्य जैविक औषधियों का उत्पादन।
- जीन चिकित्सा (Gene Therapy): आनुवंशिक रोगों के उपचार के लिए जीन-आधारित तकनीकों का उपयोग।
- निदान (Diagnosis): PCR तथा ELISA जैसी तकनीकों से रोगों की पहचान।
- पशुपालन (Animal Husbandry): ट्रांसजेनिक पशुओं का विकास और जैविक अनुसंधान।
कृषि में जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology in Agriculture)
पारंपरिक कृषि में फसलों के वांछित गुण प्राप्त करने के लिए चयन और संकरण का उपयोग किया जाता है। आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी की मदद से फसलों में विशेष जीन डालकर या उनकी अभिव्यक्ति बदलकर कीट-प्रतिरोध, रोग-प्रतिरोध और अन्य उपयोगी गुण विकसित किए जा सकते हैं।
इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
- फसलों को कीटों और कुछ रोगों से बचाना।
- रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग को कुछ परिस्थितियों में कम करना।
- पोषण गुणवत्ता में सुधार करना।
- फसल की उपज और गुणवत्ता बढ़ाने में सहायता करना।
- पौधों को कुछ पर्यावरणीय तनावों के प्रति सहनशील बनाना।
2.1 Bt कपास (Bt Cotton)
Bt कपास एक आनुवंशिक रूप से संशोधित (Genetically Modified या GM) कपास है। इसमें Bacillus thuringiensis नामक जीवाणु के कुछ जीन डाले जाते हैं। ये जीन पौधे में ऐसे प्रोटीन के निर्माण में सहायता करते हैं जो कुछ हानिकारक कीटों के विरुद्ध प्रभावी होते हैं।
Bt का पूरा नाम: Bacillus thuringiensis
Bt कपास कैसे कार्य करता है?
- Bacillus thuringiensis जीवाणु में cry नामक जीन पाए जाते हैं।
- चुने हुए cry जीन को कपास के पौधे में स्थानांतरित किया जाता है।
- पौधा संबंधित कीट के विरुद्ध प्रभावी Cry प्रोटीन बनाता है।
- संवेदनशील कीट द्वारा इस प्रोटीन को खाने पर उसकी आंत में प्रोटीन सक्रिय हो सकता है।
- सक्रिय प्रोटीन आंत की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाता है, जिससे कीट मर सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: Bt प्रोटीन कीट के शरीर में पहुँचने के बाद संवेदनशील कीट की आंत की क्षारीय परिस्थितियों में सक्रिय होता है। यह प्रोटीन आंत की कोशिकाओं की झिल्ली में छिद्र बनाता है।
Bt कपास के लाभ
- कुछ प्रमुख हानिकारक कीटों से सुरक्षा।
- लक्षित कीटों के विरुद्ध कीटनाशकों की आवश्यकता कम हो सकती है।
- उचित परिस्थितियों में फसल की उपज को होने वाला नुकसान कम हो सकता है।
हालाँकि, Bt कपास सभी कीटों से सुरक्षा नहीं देता। इसका प्रभाव संबंधित कीट, फसल प्रबंधन और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कीटों में प्रतिरोध विकसित होने से रोकने के लिए उचित प्रतिरोध-प्रबंधन भी आवश्यक है।
2.2 RNA Interference (RNAi)
RNA interference (RNAi) एक जैविक प्रक्रिया है जिसमें RNA अणुओं की सहायता से किसी विशेष जीन की अभिव्यक्ति को रोका या कम किया जाता है। इसे जीन साइलेंसिंग (Gene Silencing) भी कहते हैं।
NCERT में RNAi का उदाहरण तंबाकू के पौधे और जड़-गाँठ सूत्रकृमि (Meloidogyne incognita) से संबंधित है।
RNAi की कार्यविधि
- सूत्रकृमि तंबाकू की जड़ों को संक्रमित करके पौधे को नुकसान पहुँचाता है।
- वैज्ञानिकों ने सूत्रकृमि के एक आवश्यक जीन की अभिव्यक्ति रोकने की रणनीति अपनाई।
- पौधे में ऐसे RNA उत्पन्न किए गए जो लक्ष्य mRNA से संबंधित थे।
- दोहरे-रज्जुक RNA (dsRNA) ने RNAi प्रक्रिया को सक्रिय किया।
- लक्ष्य mRNA नष्ट या निष्क्रिय हुआ, जिससे संबंधित प्रोटीन का निर्माण कम हुआ।
- इससे सूत्रकृमि के विकास और संक्रमण को रोकने में सहायता मिली।
परीक्षा के लिए याद रखें: RNAi जीन अभिव्यक्ति को नियंत्रित करने की प्रक्रिया है। यह उदाहरण जैव प्रौद्योगिकी द्वारा पौधों को हानिकारक परजीवियों से बचाने की संभावना दिखाता है।
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चिकित्सा में जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology in Medicine)
आधुनिक चिकित्सा में जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग उपयोगी प्रोटीन बनाने, रोगों की पहचान करने और आनुवंशिक रोगों के उपचार के नए तरीके विकसित करने में होता है।
इसके प्रमुख उदाहरण हैं:
- पुनः संयोजक इंसुलिन (Recombinant Insulin)
- जीन चिकित्सा (Gene Therapy)
- PCR द्वारा रोग निदान
- ELISA द्वारा एंटीजन या एंटीबॉडी की पहचान
- कुछ टीकों और जैविक औषधियों का उत्पादन
3.1 पुनः संयोजक इंसुलिन (Recombinant Insulin)
इंसुलिन एक पेप्टाइड हार्मोन है जो अग्न्याशय (Pancreas) की बीटा कोशिकाओं से स्रावित होता है। यह रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मधुमेह के कुछ रोगियों को इंसुलिन की आवश्यकता होती है।
पहले इंसुलिन प्राप्त करने के लिए पशुओं के अग्न्याशय का उपयोग किया जाता था। आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी से मानव इंसुलिन का उत्पादन सूक्ष्मजीवों की सहायता से किया जा सकता है।
इंसुलिन का उत्पादन कैसे होता है?
- मानव इंसुलिन बनाने से संबंधित DNA अनुक्रम प्राप्त किया जाता है।
- उपयुक्त DNA तकनीक से उसे अभिव्यक्ति करने वाले वेक्टर में डाला जाता है।
- इस पुनः संयोजक DNA को उपयुक्त मेजबान कोशिका, जैसे बैक्टीरिया या यीस्ट, में पहुँचाया जाता है।
- कोशिकाओं को नियंत्रित परिस्थितियों में विकसित किया जाता है।
- उत्पादित इंसुलिन या उसके आवश्यक घटकों को प्राप्त करके शुद्ध किया जाता है।
इंसुलिन की संरचना
मानव इंसुलिन में दो पॉलीपेप्टाइड शृंखलाएँ होती हैं:
- A-Chain: 21 अमीनो अम्ल
- B-Chain: 30 अमीनो अम्ल
दोनों शृंखलाएँ डाइसल्फाइड बंधों द्वारा जुड़ी रहती हैं।
NCERT के अनुसार, एली लिली (Eli Lilly) कंपनी ने 1983 में मानव इंसुलिन की A और B शृंखलाओं को अलग-अलग E. coli में तैयार करके और फिर उन्हें जोड़कर जैविक रूप से सक्रिय इंसुलिन बनाया।
महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य: मानव इंसुलिन में कुल 51 अमीनो अम्ल होते हैं।
3.2 जीन चिकित्सा (Gene Therapy)
जीन चिकित्सा ऐसी उपचार पद्धति है जिसमें किसी रोग के उपचार के लिए कोशिकाओं में आनुवंशिक सामग्री पहुँचाई जाती है या जीन के कार्य को संशोधित किया जाता है।
इसका उद्देश्य दोषपूर्ण जीन के प्रभाव को कम करना, उसकी कमी की भरपाई करना या कोशिका के कार्य को सुधारना हो सकता है।
ADA की कमी और जीन चिकित्सा
ADA का पूरा नाम Adenosine Deaminase है। यह एंजाइम प्रतिरक्षा तंत्र के सामान्य कार्य के लिए महत्वपूर्ण है। ADA जीन में दोष होने से गंभीर संयुक्त प्रतिरक्षा कमी (SCID) हो सकती है।
NCERT में इसका उदाहरण इस प्रकार दिया गया है:
- रोगी के रक्त से लिम्फोसाइट कोशिकाएँ प्राप्त की जाती हैं।
- प्रयोगशाला में इन कोशिकाओं में सामान्य ADA जीन पहुँचाया जाता है।
- संशोधित कोशिकाओं को उपयुक्त परिस्थितियों में विकसित किया जाता है।
- उन्हें रोगी के शरीर में वापस पहुँचाया जाता है।
- क्योंकि ये लिम्फोसाइट लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकते, इसलिए उपचार को बार-बार दोहराने की आवश्यकता पड़ सकती है।
यदि ADA जीन को प्रारंभिक अवस्था में उपयुक्त कोशिकाओं, जैसे अस्थि-मज्जा की स्टेम कोशिकाओं, में सफलतापूर्वक पहुँचाया जाए, तो अधिक स्थायी लाभ की संभावना हो सकती है। वास्तविक उपचार रोगी की स्थिति और उपलब्ध चिकित्सा पद्धति पर निर्भर करता है।
परीक्षा में पूछे जाने योग्य प्रश्न: ADA की कमी क्या है और इसके उपचार में जीन चिकित्सा की क्या भूमिका है?
3.3 आणविक निदान (Molecular Diagnosis)
किसी रोग की पहचान के लिए DNA, RNA, एंटीजन या एंटीबॉडी जैसे जैविक अणुओं का अध्ययन करना आणविक निदान कहलाता है।
NCERT में PCR और ELISA को महत्वपूर्ण निदान तकनीकों के रूप में बताया गया है।
(क) PCR — Polymerase Chain Reaction
PCR तकनीक का उपयोग DNA के किसी विशेष भाग की अनेक प्रतियाँ बनाने के लिए किया जाता है।
मुख्य चरण:
- Denaturation: DNA की दोनों शृंखलाएँ अलग होती हैं।
- Annealing: प्राइमर लक्ष्य DNA से जुड़ते हैं।
- Extension: DNA पॉलिमरेज एंजाइम नई DNA शृंखला बनाता है।
इन चरणों को बार-बार दोहराने से लक्ष्य DNA की बहुत बड़ी संख्या में प्रतियाँ बन सकती हैं।
उपयोग: कुछ संक्रमणों के निदान, आनुवंशिक परीक्षण और आणविक जीव विज्ञान के अनुसंधान में।
(ख) ELISA — Enzyme-Linked Immunosorbent Assay
ELISA एक ऐसी तकनीक है जिसमें एंटीजन और एंटीबॉडी के विशिष्ट बंधन का उपयोग किया जाता है। एंजाइम से जुड़ी अभिक्रिया के कारण रंग में परिवर्तन दिखाई दे सकता है।
उपयोग:
- रोग-संबंधित एंटीजन या एंटीबॉडी की पहचान।
- HIV संक्रमण की जाँच में उपयुक्त परीक्षणों का एक उदाहरण।
- कुछ अन्य संक्रामक रोगों के निदान में।
PCR और ELISA में अंतर
| आधार | PCR | ELISA |
|---|---|---|
| मुख्य लक्ष्य | DNA या RNA का विशिष्ट अनुक्रम | एंटीजन या एंटीबॉडी |
| सिद्धांत | न्यूक्लिक अम्ल का प्रवर्धन | एंटीजन-एंटीबॉडी अभिक्रिया |
| परिणाम | लक्ष्य न्यूक्लिक अम्ल की उपस्थिति का पता | लक्ष्य एंटीजन/एंटीबॉडी की उपस्थिति का पता |
| उपयोग | आणविक निदान | प्रतिरक्षात्मक निदान |
कैंसर के निदान और उपचार में जैव प्रौद्योगिकी
कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि और विभाजन पर सामान्य नियंत्रण बाधित होने के कारण विकसित होता है। जैव प्रौद्योगिकी से कैंसर से जुड़े जीन, प्रोटीन और अन्य जैविक संकेतकों का अध्ययन किया जा सकता है।
इसके प्रमुख उपयोग हैं:
- कैंसर से संबंधित आनुवंशिक परिवर्तनों की पहचान।
- कुछ ट्यूमर मार्करों का पता लगाना।
- लक्षित औषधियों के विकास में सहायता।
- कुछ प्रकार की प्रतिरक्षा चिकित्सा में उपयोग।
- रोग की निगरानी और उपचार की प्रतिक्रिया का आकलन।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि कोई एक जैव प्रौद्योगिकी परीक्षण सभी प्रकार के कैंसर का निदान नहीं कर सकता। सही जाँच कैंसर के प्रकार और रोगी की स्थिति पर निर्भर करती है।
ट्रांसजेनिक पशु (Transgenic Animals)
वे पशु जिनके जीनोम में आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा बाहरी जीन या संशोधित आनुवंशिक सामग्री शामिल की गई हो, ट्रांसजेनिक पशु (Transgenic Animals) कहलाते हैं।
उदाहरण: ट्रांसजेनिक चूहे, कुछ ट्रांसजेनिक मछलियाँ और अन्य अनुसंधान या उत्पादन में उपयोग किए जाने वाले पशु।
ट्रांसजेनिक पशुओं के उपयोग
1. सामान्य शरीर क्रिया विज्ञान का अध्ययन: जीन और जैविक प्रक्रियाओं के बीच संबंध समझने में मदद मिलती है।
2. रोगों का अध्ययन: मानव रोगों के कुछ पहलुओं का अध्ययन करने के लिए पशु मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।
3. जैविक उत्पादों का उत्पादन: कुछ ट्रांसजेनिक पशुओं से उपयोगी जैविक प्रोटीन प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।
4. टीकों की सुरक्षा: उपयुक्त पशु मॉडल में कुछ टीकों की सुरक्षा और प्रभाव का अध्ययन किया जा सकता है।
5. रासायनिक सुरक्षा परीक्षण: कुछ रसायनों और औषधियों के संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जा सकता है।
रोजी (Rosie) — महत्वपूर्ण उदाहरण
NCERT में रोजी नामक ट्रांसजेनिक गाय का उल्लेख है। यह पहली ट्रांसजेनिक गाय के रूप में वर्णित है जिसने मानव प्रोटीन युक्त दूध का उत्पादन किया।
उसके दूध में मानव अल्फा-लैक्टैल्ब्यूमिन पाया गया था। इसका उद्देश्य मानव शिशुओं के लिए दूध की पोषण गुणवत्ता से संबंधित अनुसंधान करना था।
परीक्षा तथ्य: रोजी ट्रांसजेनिक गाय थी, जिसने मानव अल्फा-लैक्टैल्ब्यूमिन युक्त दूध का उत्पादन किया।
जैव सुरक्षा और जैव प्रौद्योगिकी (Biosafety and Biotechnology)
आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (GMOs) के उपयोग से पहले उनके संभावित लाभों और जोखिमों का वैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक है।
मुख्य विचारणीय विषय:
- मानव स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव।
- पर्यावरण और जैव विविधता पर प्रभाव।
- गैर-लक्षित जीवों पर संभावित प्रभाव।
- कीटों में प्रतिरोध विकसित होने की संभावना।
- खाद्य उत्पादों की सुरक्षा और नियामक स्वीकृति।
जैव प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग के लिए जैव सुरक्षा मूल्यांकन, उचित निगरानी और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित निर्णय आवश्यक हैं।
जैव प्रौद्योगिकी के लाभ और सीमाएँ
| लाभ | सीमाएँ या चुनौतियाँ |
|---|---|
| उपयोगी औषधियों का उत्पादन | अनुसंधान और उत्पादन की लागत |
| कुछ फसलों में कीट-प्रतिरोध | कीटों में प्रतिरोध विकसित होने की संभावना |
| रोगों की शीघ्र पहचान में सहायता | परीक्षण की गुणवत्ता और उपलब्धता पर निर्भरता |
| आनुवंशिक रोगों के उपचार के नए विकल्प | सभी रोगों का उपचार संभव नहीं |
| पोषण गुणवत्ता सुधारने की संभावना | सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन आवश्यक |
महत्वपूर्ण शब्दावली (Important Definitions)
| शब्द | परिभाषा |
|---|---|
| Biotechnology | जीवों या जैविक प्रक्रियाओं से उपयोगी उत्पाद बनाने की तकनीक |
| Recombinant DNA | विभिन्न स्रोतों की DNA सामग्री को जोड़कर बनाया गया DNA |
| Bt Cotton | Bt जीवाणु के चुने हुए जीन वाला आनुवंशिक रूप से संशोधित कपास |
| RNAi | RNA द्वारा किसी जीन की अभिव्यक्ति को रोकने या कम करने की प्रक्रिया |
| Gene Therapy | रोग के उपचार के लिए आनुवंशिक सामग्री का उपयोग |
| PCR | DNA के विशेष अनुक्रम की अनेक प्रतियाँ बनाने की तकनीक |
| ELISA | एंटीजन-एंटीबॉडी बंधन पर आधारित परीक्षण |
| Transgenic Animal | ऐसा पशु जिसके जीनोम में आनुवंशिक इंजीनियरिंग से बाहरी या संशोधित जीन शामिल किया गया हो |
| ADA | Adenosine Deaminase नामक एंजाइम |
| GM Crop | आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा विकसित फसल |
बिहार बोर्ड परीक्षा 2027 के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1–2 अंक)
प्रश्न 1. जैव प्रौद्योगिकी क्या है?
उत्तर: जीवों, कोशिकाओं, एंजाइमों या जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग करके उपयोगी उत्पाद और सेवाएँ विकसित करने की तकनीक जैव प्रौद्योगिकी कहलाती है।
प्रश्न 2. Bt का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर: Bacillus thuringiensis।
प्रश्न 3. RNAi क्या है?
उत्तर: RNA interference वह प्रक्रिया है जिसमें RNA की सहायता से किसी विशेष जीन की अभिव्यक्ति को रोका या कम किया जाता है।
प्रश्न 4. इंसुलिन बनाने में उपयोग किए जाने वाले एक सूक्ष्मजीव का नाम लिखिए।
उत्तर: Escherichia coli (E. coli)।
प्रश्न 5. ADA का पूरा नाम क्या है?
उत्तर: Adenosine Deaminase।
प्रश्न 6. PCR का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर: Polymerase Chain Reaction।
प्रश्न 7. ELISA का उपयोग किसलिए होता है?
उत्तर: एंटीजन या एंटीबॉडी की पहचान के लिए।
प्रश्न 8. रोजी कौन थी?
उत्तर: रोजी एक ट्रांसजेनिक गाय थी, जिसके दूध में मानव अल्फा-लैक्टैल्ब्यूमिन पाया गया था।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2–3 अंक)
प्रश्न 9. Bt कपास की कार्यविधि समझाइए।
उत्तर: Bt कपास में Bacillus thuringiensis के चुने हुए cry जीन डाले जाते हैं। इन जीनों की सहायता से पौधा Cry प्रोटीन बनाता है। संवेदनशील कीट द्वारा इसे खाने पर कीट की आंत में प्रोटीन सक्रिय होकर कोशिकाओं की झिल्ली को नुकसान पहुँचाता है। इससे लक्षित कीट की मृत्यु हो सकती है।
प्रश्न 10. RNAi का कृषि में क्या महत्व है?
उत्तर: RNAi की मदद से हानिकारक परजीवी या कीट के आवश्यक जीन की अभिव्यक्ति कम की जा सकती है। इससे पौधों को कुछ हानिकारक जीवों से बचाने की संभावना होती है। NCERT का उदाहरण तंबाकू के पौधे और Meloidogyne incognita सूत्रकृमि से संबंधित है।
प्रश्न 11. जीन चिकित्सा क्या है?
उत्तर: जीन चिकित्सा ऐसी उपचार पद्धति है जिसमें रोग के उपचार के लिए कोशिकाओं में आनुवंशिक सामग्री पहुँचाई जाती है या जीन के कार्य को संशोधित किया जाता है। इसका उद्देश्य दोषपूर्ण जीन के प्रभाव को कम करना या सामान्य जैविक कार्य बहाल करने में सहायता करना है।
प्रश्न 12. PCR और ELISA में दो अंतर लिखिए।
उत्तर:
- PCR लक्ष्य DNA या RNA की पहचान के लिए न्यूक्लिक अम्ल का प्रवर्धन करता है, जबकि ELISA एंटीजन-एंटीबॉडी अभिक्रिया पर आधारित है।
- PCR में प्राइमर और DNA पॉलिमरेज जैसे घटक उपयोग होते हैं, जबकि ELISA में एंजाइम-संबद्ध प्रतिरक्षात्मक अभिक्रिया से संकेत प्राप्त किया जाता है।
प्रश्न 13. ट्रांसजेनिक पशुओं के कोई तीन उपयोग लिखिए।
उत्तर:
- मानव रोगों के अध्ययन के लिए पशु मॉडल तैयार करना।
- उपयोगी जैविक उत्पादों के उत्पादन में सहायता।
- कुछ औषधियों और टीकों की सुरक्षा का अध्ययन।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4–5 अंक)
प्रश्न 14. चिकित्सा के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: चिकित्सा के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के अनेक महत्वपूर्ण अनुप्रयोग हैं:
- पुनः संयोजक इंसुलिन: आनुवंशिक इंजीनियरिंग की सहायता से मानव इंसुलिन का उत्पादन किया जा सकता है।
- जीन चिकित्सा: कुछ आनुवंशिक रोगों के उपचार के लिए जीन-आधारित विधियों का उपयोग किया जाता है।
- PCR: DNA या RNA के विशिष्ट अनुक्रम की पहचान के लिए उपयोग किया जाता है।
- ELISA: एंटीजन या एंटीबॉडी की पहचान में सहायक है।
- टीके और जैविक औषधियाँ: आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी कई उपयोगी जैविक उत्पादों के विकास में योगदान देती है।
इस प्रकार जैव प्रौद्योगिकी रोग निदान, औषधि निर्माण और उपचार के नए विकल्प विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रश्न 15. ADA की कमी के उपचार में जीन चिकित्सा की भूमिका समझाइए।
उत्तर: ADA एंजाइम की कमी से प्रतिरक्षा तंत्र प्रभावित हो सकता है। जीन चिकित्सा में रोगी की कुछ लिम्फोसाइट कोशिकाओं को अलग करके उनमें सामान्य ADA जीन पहुँचाया जा सकता है। संशोधित कोशिकाओं को रोगी के शरीर में वापस पहुँचाया जाता है। क्योंकि ये कोशिकाएँ सीमित समय तक जीवित रह सकती हैं, इसलिए उपचार दोहराने की आवश्यकता पड़ सकती है। उपयुक्त स्टेम कोशिकाओं में जीन पहुँचाने से अधिक स्थायी लाभ संभव हो सकता है।
प्रश्न 16. Bt कपास और RNA interference की तुलना कीजिए।
उत्तर:
| आधार | Bt कपास | RNAi |
|---|---|---|
| मुख्य सिद्धांत | कीट-प्रभावी Cry प्रोटीन का निर्माण | लक्ष्य जीन की अभिव्यक्ति कम करना |
| संबंधित घटक | B. thuringiensis के cry जीन | लक्ष्य RNA से संबंधित RNA अणु |
| प्रभाव | संवेदनशील कीट को नुकसान पहुँचाता है | लक्ष्य जीन से बनने वाले उत्पाद को कम करता है |
| NCERT उदाहरण | Bt कपास | तंबाकू और जड़-गाँठ सूत्रकृमि |
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जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके अनुप्रयोग: 20 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न
बिहार बोर्ड कक्षा 12 जीव विज्ञान परीक्षा 2027 की तैयारी के लिए नीचे दिए गए MCQs का अभ्यास करें। प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्प, सही उत्तर और व्याख्या दी गई है। ये प्रश्न NCERT आधारित अभ्यास के लिए उपयोगी हैं।
प्रश्न 1. Bt विष (Bt toxin) का उत्पादन प्राकृतिक रूप से कौन करता है?
(A) Escherichia coli
(B) Bacillus thuringiensis
(C) Rhizobium
(D) Lactobacillus
सही उत्तर: (B) Bacillus thuringiensis
व्याख्या: Bacillus thuringiensis एक जीवाणु है जो Cry जैसे कीट-प्रभावी प्रोटीन बनाता है। इसके कुछ जीन का उपयोग Bt फसलों के विकास में किया जाता है।
प्रश्न 2. Bt कपास में मुख्य रूप से किस प्रकार के जीन डाले जाते हैं?
(A) cry जीन
(B) इंसुलिन जीन
(C) ADA जीन
(D) हीमोग्लोबिन जीन
सही उत्तर: (A) cry जीन
व्याख्या: cry जीन से बनने वाले Cry प्रोटीन कुछ हानिकारक कीटों के विरुद्ध प्रभावी होते हैं। इसलिए इन जीन का उपयोग Bt कपास विकसित करने में किया जाता है।
प्रश्न 3. Bt विष संवेदनशील कीट की आंत में किस प्रकार की परिस्थितियों में सक्रिय होता है?
(A) अत्यधिक अम्लीय
(B) क्षारीय
(C) पूर्णतः उदासीन
(D) केवल ठंडी परिस्थितियों में
सही उत्तर: (B) क्षारीय
व्याख्या: संवेदनशील कीट की आंत की क्षारीय परिस्थितियों में Bt प्रोटीन सक्रिय हो सकता है। सक्रिय प्रोटीन आंत की कोशिकाओं की झिल्ली को नुकसान पहुँचाता है।
प्रश्न 4. RNA interference (RNAi) का प्रमुख परिणाम क्या है?
(A) प्रोटीन संश्लेषण हमेशा बढ़ जाता है
(B) लक्ष्य जीन की अभिव्यक्ति कम हो सकती है
(C) DNA हमेशा दोगुना हो जाता है
(D) कोशिका भित्ति नष्ट हो जाती है
सही उत्तर: (B) लक्ष्य जीन की अभिव्यक्ति कम हो सकती है
व्याख्या: RNA interference एक जीन साइलेंसिंग प्रक्रिया है। इसमें संबंधित RNA अणु लक्ष्य mRNA को निष्क्रिय या नष्ट करने में सहायता करते हैं, जिससे प्रोटीन का निर्माण कम हो सकता है।
प्रश्न 5. NCERT में RNAi के उदाहरण में तंबाकू की जड़ों को कौन संक्रमित करता है?
(A) मच्छर
(B) जड़-गाँठ सूत्रकृमि
(C) फीताकृमि
(D) प्लाज्मोडियम
सही उत्तर: (B) जड़-गाँठ सूत्रकृमि
व्याख्या: Meloidogyne incognita एक जड़-गाँठ सूत्रकृमि है। यह पौधों की जड़ों को संक्रमित करके नुकसान पहुँचाता है। RNAi तकनीक का उपयोग इसकी आवश्यक जीन अभिव्यक्ति को रोकने के लिए किया जा सकता है।
प्रश्न 6. मानव इंसुलिन की A-Chain में कितने अमीनो अम्ल होते हैं?
(A) 21
(B) 30
(C) 40
(D) 51
सही उत्तर: (A) 21
व्याख्या: मानव इंसुलिन की A-Chain में 21 अमीनो अम्ल होते हैं, जबकि B-Chain में 30 अमीनो अम्ल होते हैं।
प्रश्न 7. मानव इंसुलिन की B-Chain में कितने अमीनो अम्ल होते हैं?
(A) 21
(B) 25
(C) 30
(D) 51
सही उत्तर: (C) 30
व्याख्या: इंसुलिन की B-Chain में 30 अमीनो अम्ल होते हैं। इसकी A-Chain में 21 अमीनो अम्ल होते हैं। दोनों शृंखलाएँ डाइसल्फाइड बंधों द्वारा जुड़ी रहती हैं।
प्रश्न 8. NCERT के अनुसार Eli Lilly ने मानव इंसुलिन की शृंखलाएँ तैयार करने के लिए किस जीवाणु का उपयोग किया?
(A) Bacillus thuringiensis
(B) Escherichia coli
(C) Rhizobium
(D) Vibrio cholerae
सही उत्तर: (B) Escherichia coli
व्याख्या: 1983 में Eli Lilly कंपनी ने मानव इंसुलिन की A और B शृंखलाओं को अलग-अलग Escherichia coli में तैयार करके उन्हें जोड़कर जैविक रूप से सक्रिय इंसुलिन बनाया।
प्रश्न 9. ADA का पूरा नाम क्या है?
(A) Adenosine Deaminase
(B) Adenine Diphosphate
(C) Active DNA Antigen
(D) Amino Deoxyribose Acid
सही उत्तर: (A) Adenosine Deaminase
व्याख्या: ADA का पूरा नाम Adenosine Deaminase है। यह एक एंजाइम है, जिसकी कमी प्रतिरक्षा तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
प्रश्न 10. ADA की कमी से मुख्य रूप से कौन-सा तंत्र प्रभावित होता है?
(A) पाचन तंत्र
(B) प्रतिरक्षा तंत्र
(C) कंकाल तंत्र
(D) उत्सर्जन तंत्र
सही उत्तर: (B) प्रतिरक्षा तंत्र
व्याख्या: ADA की कमी से Severe Combined Immunodeficiency (SCID) हो सकती है। इस रोग में शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होती है।
प्रश्न 11. PCR का मुख्य कार्य क्या है?
(A) प्रोटीन का पाचन
(B) विशिष्ट DNA अनुक्रम की अनेक प्रतियाँ बनाना
(C) लिपिड का निर्माण
(D) कोशिका भित्ति बनाना
सही उत्तर: (B) विशिष्ट DNA अनुक्रम की अनेक प्रतियाँ बनाना
व्याख्या: PCR का पूरा नाम Polymerase Chain Reaction है। इसका उपयोग DNA के किसी विशेष अनुक्रम की अनेक प्रतियाँ बनाने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 12. PCR में DNA की नई शृंखला बनाने वाला एंजाइम कौन-सा है?
(A) DNA Ligase
(B) DNA Polymerase
(C) Lipase
(D) Amylase
सही उत्तर: (B) DNA Polymerase
व्याख्या: DNA Polymerase प्राइमर से आगे नए न्यूक्लियोटाइड जोड़कर DNA की नई शृंखला बनाता है। PCR में यह एंजाइम DNA के प्रवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 13. ELISA का सिद्धांत किस पर आधारित है?
(A) एंटीजन-एंटीबॉडी की विशिष्ट अभिक्रिया
(B) प्रकाश संश्लेषण
(C) DNA प्रतिकृति मात्र
(D) किण्वन
सही उत्तर: (A) एंटीजन-एंटीबॉडी की विशिष्ट अभिक्रिया
व्याख्या: ELISA का पूरा नाम Enzyme-Linked Immunosorbent Assay है। यह एंटीजन और एंटीबॉडी के विशिष्ट बंधन का उपयोग करके जैविक पदार्थों की पहचान करने में सहायता करता है।
प्रश्न 14. ELISA में रंग परिवर्तन सामान्यतः किसकी सहायता से होता है?
(A) एंजाइम-संबंधित अभिक्रिया
(B) क्लोरोफिल
(C) हीमोग्लोबिन
(D) सेल्युलेस द्वारा पाचन
सही उत्तर: (A) एंजाइम-संबंधित अभिक्रिया
व्याख्या: ELISA में एंजाइम उपयुक्त सब्सट्रेट के साथ अभिक्रिया करके रंगीन संकेत उत्पन्न कर सकता है। इस संकेत की सहायता से परीक्षण के परिणाम का आकलन किया जाता है।
प्रश्न 15. ट्रांसजेनिक पशु किसे कहते हैं?
(A) केवल क्लोन किए गए पशु को
(B) ऐसे पशु को जिसके जीनोम में आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा बाहरी या संशोधित जीन शामिल किया गया हो
(C) केवल संकर पशु को
(D) प्राकृतिक रूप से उत्पन्न प्रत्येक पशु को
सही उत्तर: (B) ऐसे पशु को जिसके जीनोम में आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा बाहरी या संशोधित जीन शामिल किया गया हो
व्याख्या: ट्रांसजेनिक पशुओं के जीनोम में आनुवंशिक इंजीनियरिंग की सहायता से बाहरी जीन या संशोधित आनुवंशिक सामग्री शामिल की जाती है। इनका उपयोग अनुसंधान और जैविक उत्पादों के विकास में किया जाता है।
प्रश्न 16. NCERT में वर्णित ट्रांसजेनिक गाय रोजी के दूध में कौन-सा मानव प्रोटीन पाया गया?
(A) इंसुलिन
(B) मानव अल्फा-लैक्टैल्ब्यूमिन
(C) हीमोग्लोबिन
(D) कोलेजन
सही उत्तर: (B) मानव अल्फा-लैक्टैल्ब्यूमिन
व्याख्या: रोजी एक ट्रांसजेनिक गाय थी। उसके दूध में मानव अल्फा-लैक्टैल्ब्यूमिन पाया गया था। इस उदाहरण का संबंध दूध की पोषण गुणवत्ता के अध्ययन से है।
प्रश्न 17. जैव प्रौद्योगिकी में आणविक निदान का प्रमुख लाभ क्या है?
(A) रोगों की पहचान में सहायता
(B) हर रोग को निश्चित रूप से ठीक करना
(C) सभी बैक्टीरिया को उपयोगी बनाना
(D) सभी आनुवंशिक परिवर्तन रोकना
सही उत्तर: (A) रोगों की पहचान में सहायता
व्याख्या: PCR जैसी तकनीकें रोग से संबंधित DNA या RNA की पहचान करने में सहायता कर सकती हैं। इससे कुछ रोगों का शीघ्र और अधिक संवेदनशील निदान संभव होता है।
प्रश्न 18. जीन चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(A) हर जीन को हटाना
(B) रोग के उपचार के लिए आनुवंशिक सामग्री या जीन के कार्य में हस्तक्षेप करना
(C) केवल रक्त समूह बदलना
(D) केवल पाचन एंजाइम बढ़ाना
सही उत्तर: (B) रोग के उपचार के लिए आनुवंशिक सामग्री या जीन के कार्य में हस्तक्षेप करना
व्याख्या: जीन चिकित्सा में आनुवंशिक सामग्री का उपयोग करके दोषपूर्ण जीन के प्रभाव को कम करने या कोशिकाओं के सामान्य कार्य को सुधारने का प्रयास किया जाता है।
प्रश्न 19. Bt फसल में cry जीन का मुख्य उपयोग क्या है?
(A) कीट-प्रभावी प्रोटीन बनाना
(B) फल में विटामिन C हमेशा दोगुना करना
(C) जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करना
(D) प्रकाश संश्लेषण समाप्त करना
सही उत्तर: (A) कीट-प्रभावी प्रोटीन बनाना
व्याख्या: cry जीन से बनने वाले Cry प्रोटीन कुछ संवेदनशील कीटों के विरुद्ध प्रभावी होते हैं। इस तकनीक का उपयोग Bt कपास जैसी फसलें विकसित करने में किया जाता है।
प्रश्न 20. आनुवंशिक रूप से संशोधित फसल के पर्यावरणीय मूल्यांकन में किस बात पर ध्यान देना आवश्यक है?
(A) केवल पौधे की ऊँचाई
(B) केवल बीज का रंग
(C) गैर-लक्षित जीवों और जैव विविधता पर संभावित प्रभाव
(D) केवल पत्तियों की संख्या
सही उत्तर: (C) गैर-लक्षित जीवों और जैव विविधता पर संभावित प्रभाव
व्याख्या: GM फसलों के मूल्यांकन में गैर-लक्षित जीवों, जैव विविधता, कीटों में प्रतिरोध विकसित होने की संभावना तथा अन्य संभावित पर्यावरणीय प्रभावों पर ध्यान देना आवश्यक है।
Quick Revision Notes — एक मिनट में पूरा अध्याय
- Bt Cotton: cry जीन → Cry प्रोटीन → संवेदनशील कीट की आंत को नुकसान।
- RNAi: RNA की सहायता से लक्ष्य जीन की अभिव्यक्ति कम होती है।
- Recombinant Insulin: मानव इंसुलिन का उत्पादन आनुवंशिक इंजीनियरिंग से।
- Gene Therapy: रोग के उपचार के लिए जीन-आधारित हस्तक्षेप।
- ADA Deficiency: प्रतिरक्षा तंत्र को प्रभावित करने वाला आनुवंशिक विकार।
- PCR: लक्ष्य DNA का प्रवर्धन।
- ELISA: एंटीजन या एंटीबॉडी की पहचान।
- Transgenic Animals: जीनोम में बाहरी या संशोधित जीन वाले पशु।
- Rosie: मानव अल्फा-लैक्टैल्ब्यूमिन युक्त दूध देने वाली ट्रांसजेनिक गाय।
परीक्षा की तैयारी कैसे करें?
बिहार बोर्ड की तैयारी के लिए निम्नलिखित विषयों पर विशेष ध्यान दें:
- Bt कपास की कार्यविधि और cry जीन।
- RNA interference तथा सूत्रकृमि का उदाहरण।
- पुनः संयोजक मानव इंसुलिन का उत्पादन।
- ADA की कमी और जीन चिकित्सा।
- PCR तथा ELISA में अंतर।
- ट्रांसजेनिक पशुओं के उपयोग और रोजी का उदाहरण।
