Biotechnology: Principles and Processes Class 12 Biology Notes in Hindi | Bihar Board 2027

Class 12 Biology Biotechnology Notes in Hindi | Bihar Board 2027

जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) विज्ञान की वह शाखा है जिसमें जीवों, कोशिकाओं, एंजाइमों या जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग करके मनुष्य के लिए उपयोगी उत्पाद बनाए जाते हैं।

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इस तकनीक का उपयोग चिकित्सा, कृषि, खाद्य उत्पादन, उद्योग तथा पर्यावरण संरक्षण में किया जाता है। उदाहरण के लिए, इंसुलिन का उत्पादन, रोगों की पहचान, कीट-प्रतिरोधी फसलों का विकास और उपयोगी एंजाइमों का निर्माण जैव प्रौद्योगिकी के प्रमुख अनुप्रयोग हैं। Download NCERT BOOK PDF.

आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी में जीवों के DNA में परिवर्तन करके इच्छित गुण प्राप्त किए जा सकते हैं।

जैव प्रौद्योगिकी की परिभाषा (Definition)

जीवों, कोशिकाओं अथवा उनके जैविक घटकों का उपयोग करके उपयोगी पदार्थों और सेवाओं का उत्पादन करने की तकनीक को जैव प्रौद्योगिकी कहते हैं।

जैव प्रौद्योगिकी के प्रमुख उपयोग

  1. मानव इंसुलिन जैसे चिकित्सीय प्रोटीन का उत्पादन।
  2. रोगों के निदान के लिए आणविक तकनीकों का उपयोग।
  3. आनुवंशिक रूप से रूपांतरित फसलों का विकास।
  4. औद्योगिक एंजाइमों तथा उपयोगी जैविक पदार्थों का निर्माण।
  5. पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में सहायता।
  6. कृषि उत्पादन और फसलों की गुणवत्ता में सुधार।

आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी (Modern Biotechnology)

आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी का विकास मुख्य रूप से आनुवंशिक अभियांत्रिकी (Genetic Engineering) और नियंत्रित परिस्थितियों में जीवों या कोशिकाओं के संवर्धन पर आधारित है।

इसमें DNA को काटना, इच्छित DNA खंड को अलग करना, उसे किसी अन्य DNA अणु से जोड़ना तथा उपयुक्त पोषक माध्यम में कोशिका के अंदर उसकी प्रतिकृति बनवाना शामिल है।

उदाहरण के लिए, मानव इंसुलिन बनाने वाले जीन को बैक्टीरिया में प्रवेश कराकर इंसुलिन का उत्पादन कराया जा सकता है।

आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के दो प्रमुख सिद्धांत

1. Genetic Engineering (आनुवंशिक अभियांत्रिकी)

इस तकनीक में DNA या RNA की संरचना में परिवर्तन करके किसी जीव के आनुवंशिक पदार्थ में इच्छित बदलाव किया जाता है। इसमें पुनर्संयोजित DNA तकनीक (Recombinant DNA Technology) का महत्वपूर्ण स्थान है।

2. Bioprocess Engineering (जैव-प्रक्रम अभियांत्रिकी)

इसमें सूक्ष्मजीवों, कोशिकाओं या उनके उत्पादों को नियंत्रित परिस्थितियों में बड़े पैमाने पर विकसित करके उपयोगी पदार्थ बनाए जाते हैं।

उदाहरण: बायोरिएक्टर में इंसुलिन या अन्य उपयोगी प्रोटीन का उत्पादन।

पुनर्संयोजित DNA तकनीक (Recombinant DNA Technology)

Recombinant DNA Technology आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी की एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसमें अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त DNA खंडों को जोड़कर एक नया DNA अणु बनाया जाता है।

ऐसे DNA को पुनर्संयोजित DNA (Recombinant DNA या rDNA) कहते हैं।

उदाहरण के लिए, मानव इंसुलिन बनाने वाले जीन को प्लास्मिड DNA में जोड़कर पुनर्संयोजित DNA तैयार किया जा सकता है।

पुनर्संयोजित DNA तकनीक के प्रमुख चरण

  1. इच्छित DNA या जीन को अलग करना।
  2. उपयुक्त प्रतिबंधन एंजाइम (Restriction Enzyme) से DNA काटना।
  3. उपयुक्त वाहक (Vector) को तैयार करना।
  4. DNA खंड को वाहक से जोड़ना।
  5. पुनर्संयोजित DNA को परपोषी कोशिका (Host Cell) में प्रवेश कराना।
  6. रूपांतरित कोशिकाओं का चयन करना।
  7. इच्छित DNA या जीन की प्रतिकृति बनाना तथा आवश्यक उत्पाद प्राप्त करना।

Recombinant DNA Technology का महत्व

इस तकनीक की सहायता से उपयोगी प्रोटीन, चिकित्सीय पदार्थ और आनुवंशिक रूप से रूपांतरित जीव बनाए जा सकते हैं। इसका उपयोग अनुसंधान, चिकित्सा, कृषि और औद्योगिक उत्पादन में होता है।

पुनर्संयोजित DNA तकनीक के लिए आवश्यक उपकरण (Tools of Recombinant DNA Technology)

पुनर्संयोजित DNA तकनीक के लिए कुछ विशेष जैविक उपकरणों की आवश्यकता होती है।

प्रमुख उपकरण हैं:

  • Restriction Enzymes — प्रतिबंधन एंजाइम।
  • DNA Ligase — DNA लाइगेज।
  • DNA Polymerase — DNA पॉलीमरेज।
  • Cloning Vectors — क्लोनिंग वाहक।
  • Competent Host Cells — सक्षम परपोषी कोशिकाएँ।

इनमें प्रत्येक की भूमिका अलग होती है। Restriction Enzymes DNA को विशिष्ट स्थानों पर काटते हैं, DNA Ligase DNA खंडों को जोड़ता है और DNA Polymerase DNA की प्रतिकृति बनाने में सहायता करता है।

4.1 प्रतिबंधन एंजाइम (Restriction Enzymes)

प्रतिबंधन एंजाइम विशेष प्रकार के एंजाइम हैं जो DNA के विशिष्ट न्यूक्लियोटाइड अनुक्रमों को पहचानते हैं और उन स्थानों पर DNA को काटते हैं।

ये एंजाइम बैक्टीरिया में पाए जाते हैं और प्राकृतिक रूप से बाहरी DNA के विरुद्ध रक्षा प्रणाली का हिस्सा होते हैं।

आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी में इनका उपयोग इच्छित DNA खंड को अलग करने तथा पुनर्संयोजित DNA बनाने में किया जाता है।

Restriction Enzymes के प्रकार

1. Exonucleases (एक्सोन्यूक्लिएज): DNA अणु के सिरों से न्यूक्लियोटाइड हटाते हैं।

2. Endonucleases (एंडोन्यूक्लिएज): DNA अणु के भीतर विशिष्ट स्थानों पर फॉस्फोडाइएस्टर बंधों को तोड़ते हैं।

आनुवंशिक अभियांत्रिकी में विशिष्ट अनुक्रमों को पहचानने वाले प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज का विशेष महत्व है।

प्रतिबंधन एंजाइम की नामकरण पद्धति

प्रतिबंधन एंजाइमों के नाम सामान्यतः उन बैक्टीरिया के नामों से लिए जाते हैं जिनसे उन्हें प्राप्त किया जाता है।

उदाहरण: EcoRI

  • E: Escherichia वंश।
  • co: coli प्रजाति का संकेत।
  • R: संबंधित स्ट्रेन का संकेत।
  • I: उस स्ट्रेन से पहचाने गए एंजाइमों में प्रथम एंजाइम।

EcoRI की कार्यप्रणाली

EcoRI DNA में विशिष्ट छह-क्षारक युग्म वाले अनुक्रम को पहचानता है:

5′ — G A A T T C — 3′
3′ — C T T A A G — 5′

यह अनुक्रम को इस प्रकार काटता है:

5′ — G ↓ A A T T C — 3′
3′ — C T T A A ↑ G — 5′

इस कटाव से एकल-रज्जुक वाले छोटे सिरे बनते हैं, जिन्हें Sticky Ends (चिपचिपे सिरे) कहते हैं।

ये सिरे पूरक DNA अनुक्रमों से हाइड्रोजन बंध बनाकर जुड़ सकते हैं। DNA Ligase इन DNA खंडों के बीच फॉस्फोडाइएस्टर बंध बनाकर जोड़ को स्थायी करता है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण: EcoRI एक प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज है, जो विशिष्ट DNA अनुक्रम को पहचानकर काटता है।

4.2 DNA Ligase (DNA लाइगेज)

DNA Ligase एक एंजाइम है जो DNA के टूटे हुए खंडों को जोड़ता है। यह DNA के शर्करा-फॉस्फेट ढाँचे में फॉस्फोडाइएस्टर बंध बनाता है।

पुनर्संयोजित DNA तकनीक में इसका उपयोग इच्छित DNA खंड को वाहक DNA से जोड़ने के लिए किया जाता है।

कार्य: DNA खंडों को स्थायी रूप से जोड़ना।

4.3 DNA Polymerase (DNA पॉलीमरेज)

DNA Polymerase वह एंजाइम है जो साँचे (Template) के आधार पर नए DNA रज्जुक का निर्माण करता है।

इसका उपयोग DNA की प्रतिकृति बनाने और PCR जैसी तकनीकों में किया जाता है।

PCR में ऊष्मा-सहिष्णु DNA Polymerase का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, Taq Polymerase को Thermus aquaticus नामक जीवाणु से प्राप्त किया जाता है।

4.4 Reverse Transcriptase (रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज)

Reverse Transcriptase वह एंजाइम है जो RNA को साँचे के रूप में उपयोग करके DNA का निर्माण करता है।

इससे बनने वाले DNA को पूरक DNA (Complementary DNA या cDNA) कहा जाता है।

इस तकनीक का उपयोग विशेष रूप से RNA से संबंधित अनुसंधान तथा यूकैरियोटिक जीनों के अध्ययन में किया जाता है।

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पैलिंड्रोमिक DNA अनुक्रम (Palindromic DNA Sequences)

DNA का ऐसा न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम जिसे दोनों पूरक रज्जुकों पर 5′ से 3′ दिशा में पढ़ने पर समान अनुक्रम प्राप्त होता है, पैलिंड्रोमिक अनुक्रम कहलाता है।

प्रतिबंधन एंजाइम अक्सर ऐसे विशिष्ट अनुक्रमों को पहचानते हैं।

उदाहरण:

5′ — G A A T T C — 3′
3′ — C T T A A G — 5′

ऊपरी रज्जुक को 5′ से 3′ दिशा में पढ़ने पर GAATTC मिलता है। निचले रज्जुक को भी 5′ से 3′ दिशा में पढ़ने पर GAATTC मिलता है।

इसी कारण इसे पैलिंड्रोमिक DNA अनुक्रम कहा जाता है।

परीक्षा में याद रखें: पैलिंड्रोमिक DNA अनुक्रम प्रतिबंधन एंजाइमों द्वारा पहचान के महत्वपूर्ण स्थल होते हैं।

क्लोनिंग वाहक (Cloning Vectors)

क्लोनिंग वाहक DNA का ऐसा अणु है जो इच्छित DNA खंड को परपोषी कोशिका में पहुँचाने और उसकी प्रतिकृति बनाने में सहायता करता है।

बैक्टीरिया में पाए जाने वाले प्लास्मिड तथा बैक्टीरियोफेज DNA सामान्य क्लोनिंग वाहकों के उदाहरण हैं।

एक अच्छे क्लोनिंग वाहक में DNA की प्रतिकृति, चयन तथा विदेशी DNA को जोड़ने के लिए उपयुक्त विशेषताएँ होनी चाहिए।

क्लोनिंग वाहक की प्रमुख विशेषताएँ

1. Origin of Replication (ori)

यह DNA का वह विशिष्ट स्थान है जहाँ से DNA की प्रतिकृति बनना शुरू होती है।

वाहक में ori होने से उसकी प्रतिकृति परपोषी कोशिका के भीतर बन सकती है। इसकी प्रकृति और प्रतिकृति नियंत्रण से यह भी प्रभावित होता है कि कोशिका में वाहक की कितनी प्रतियाँ बनेंगी।

2. Selectable Marker (चयन योग्य चिह्न)

यह ऐसी आनुवंशिक विशेषता है जो रूपांतरित कोशिकाओं की पहचान या चयन करने में मदद करती है।

उदाहरण के लिए, कुछ प्लास्मिड में एंटीबायोटिक प्रतिरोध देने वाले जीन होते हैं। उपयुक्त चयन परिस्थितियों में इन जीनों की सहायता से वाहक प्राप्त करने वाली कोशिकाओं की पहचान की जा सकती है।

3. Cloning Site (क्लोनिंग स्थल)

यह वाहक DNA का ऐसा स्थान होता है जहाँ विदेशी DNA खंड को जोड़ा जा सकता है।

अच्छे क्लोनिंग वाहक में उपयुक्त प्रतिबंधन स्थलों की व्यवस्था होती है, जिससे इच्छित DNA खंड को जोड़ना आसान होता है।

4. छोटा आकार

छोटे आकार के वाहक को अलग करना, उसमें परिवर्तन करना और परपोषी कोशिका में प्रवेश कराना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

हालाँकि, वाहक का उपयुक्त आकार उसके उद्देश्य तथा वह कितना DNA ले जा सकता है, इस पर भी निर्भर करता है।

प्लास्मिड (Plasmid)

प्लास्मिड सामान्यतः बैक्टीरिया में पाया जाने वाला छोटा, प्रायः वृत्ताकार, द्विरज्जुकीय DNA अणु है, जो मुख्य गुणसूत्रीय DNA से अलग प्रतिकृति बना सकता है।

प्लास्मिड का उपयोग क्लोनिंग वाहक के रूप में किया जाता है क्योंकि इनमें विदेशी DNA जोड़ा जा सकता है और उपयुक्त परपोषी कोशिकाओं में इनकी प्रतिकृति बनाई जा सकती है।

उदाहरण: pBR322 एक प्रसिद्ध प्लास्मिड क्लोनिंग वाहक है।

pBR322 की प्रमुख विशेषताएँ

  • इसमें DNA प्रतिकृति के लिए ori होता है।
  • इसमें ampR जीन होता है, जो एम्पिसिलिन प्रतिरोध प्रदान करता है।
  • इसमें tetR जीन होता है, जो टेट्रासाइक्लिन प्रतिरोध प्रदान करता है।
  • इसमें विदेशी DNA जोड़ने के लिए विभिन्न प्रतिबंधन स्थल होते हैं।

इन विशेषताओं के कारण pBR322 का उपयोग आणविक जीवविज्ञान में क्लोनिंग और पुनर्संयोजित DNA के अध्ययन में किया जाता है।

सक्षम परपोषी कोशिकाएँ (Competent Host Cells)

पुनर्संयोजित DNA को कोशिका के भीतर पहुँचाने के लिए ऐसी परपोषी कोशिकाओं की आवश्यकता होती है जो बाहरी DNA को ग्रहण कर सकें।

इन कोशिकाओं को सक्षम परपोषी कोशिकाएँ (Competent Host Cells) कहा जाता है।

बैक्टीरिया में DNA का प्रवेश कराने के लिए विभिन्न विधियाँ उपयोग की जाती हैं, जैसे रासायनिक उपचार, हीट शॉक, इलेक्ट्रोपोरेशन और कुछ परिस्थितियों में माइक्रोइंजेक्शन या अन्य विशेष तकनीकें।

Transformation (रूपांतरण)

जब कोई कोशिका बाहरी DNA को ग्रहण करके उसे अपने भीतर बनाए रखती है या उसका उपयोग करती है, तो इस प्रक्रिया को रूपांतरण (Transformation) कहते हैं।

बैक्टीरिया में प्लास्मिड DNA का प्रवेश आनुवंशिक रूपांतरण का एक सामान्य उदाहरण है।

महत्व: इस प्रक्रिया से इच्छित जीन को परपोषी कोशिका में पहुँचाया जा सकता है।

पुनर्संयोजित DNA तकनीक के प्रमुख चरण

पुनर्संयोजित DNA तकनीक को कई क्रमिक चरणों में समझा जा सकता है। इसमें DNA को अलग करना, उपयुक्त एंजाइमों से काटना, DNA खंडों को जोड़ना, उन्हें परपोषी कोशिका में पहुँचाना और इच्छित कोशिकाओं का चयन करना शामिल है।

इन सभी चरणों के लिए उपयुक्त उपकरण, एंजाइम और नियंत्रित परिस्थितियाँ आवश्यक होती हैं।

चरण 1: DNA का पृथक्करण (Isolation of DNA)

सबसे पहले इच्छित जीन वाले जीव या कोशिकाओं से DNA को अलग किया जाता है।

इसके लिए कोशिका की दीवार या झिल्ली को तोड़कर DNA को अन्य कोशिकीय घटकों से अलग किया जाता है।

DNA को शुद्ध करने के लिए उपयुक्त एंजाइमों और रासायनिक प्रक्रियाओं का उपयोग किया जा सकता है।

चरण 2: DNA को काटना (Cutting of DNA)

इच्छित DNA खंड और क्लोनिंग वाहक को उपयुक्त प्रतिबंधन एंजाइम से काटा जाता है।

इससे DNA के ऐसे सिरे बन सकते हैं जो एक-दूसरे के पूरक हों और आपस में जुड़ सकें।

चरण 3: DNA खंडों को जोड़ना (Ligation)

इच्छित DNA खंड को वाहक DNA से जोड़ा जाता है।

DNA Ligase इस प्रक्रिया में DNA खंडों के बीच फॉस्फोडाइएस्टर बंध बनाकर जोड़ को स्थायी बनाता है।

इस प्रकार पुनर्संयोजित DNA अणु तैयार होता है।

चरण 4: परपोषी कोशिका में प्रवेश (Introduction into Host Cell)

तैयार पुनर्संयोजित DNA को उपयुक्त परपोषी कोशिका में प्रवेश कराया जाता है।

बैक्टीरिया में इस प्रक्रिया के लिए रूपांतरण जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।

चरण 5: चयन और पहचान (Selection and Screening)

इसके बाद उन कोशिकाओं की पहचान की जाती है जिन्होंने इच्छित DNA या वाहक प्राप्त किया है।

चयन योग्य चिह्न, रिपोर्टर जीन या अन्य आणविक विधियों की मदद से वांछित कोशिकाओं को पहचाना जा सकता है।

ध्यान दें कि केवल वाहक प्राप्त करने वाली कोशिका और सही पुनर्संयोजित DNA रखने वाली कोशिका हमेशा एक ही बात नहीं होती। इसलिए कई बार अतिरिक्त स्क्रीनिंग आवश्यक होती है।

चरण 6: क्लोनिंग और जीन अभिव्यक्ति (Cloning and Gene Expression)

वांछित पुनर्संयोजित DNA रखने वाली कोशिकाओं को उपयुक्त परिस्थितियों में विकसित किया जाता है।

इससे इच्छित DNA की अनेक प्रतियाँ प्राप्त हो सकती हैं। यदि जीन सही अभिव्यक्ति प्रणाली में मौजूद है, तो उससे संबंधित RNA या प्रोटीन का निर्माण भी कराया जा सकता है।

चरण 7: उत्पाद का पृथक्करण और शुद्धीकरण

यदि उद्देश्य किसी उपयोगी प्रोटीन या जैविक पदार्थ का उत्पादन करना है, तो उसे कोशिकाओं या संवर्धन माध्यम से अलग किया जाता है।

इसके बाद उत्पाद को शुद्ध करके उसकी गुणवत्ता, सक्रियता और सुरक्षा की जाँच की जाती है। औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी में यह चरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

PCR — Polymerase Chain Reaction (पॉलिमरेज चेन रिएक्शन)

PCR एक प्रयोगशाला तकनीक है जिसके द्वारा DNA के किसी विशिष्ट खंड की बहुत अधिक प्रतियाँ बनाई जाती हैं।

इस प्रक्रिया को DNA प्रवर्धन (DNA Amplification) कहा जाता है। PCR का उपयोग रोगों के निदान, आनुवंशिक अनुसंधान, फॉरेंसिक विज्ञान तथा DNA विश्लेषण में किया जाता है।

PCR में DNA साँचे, प्राइमर, न्यूक्लियोटाइड, DNA Polymerase और उपयुक्त बफर की आवश्यकता होती है।

PCR के तीन प्रमुख चरण

1. Denaturation (विकृतिकरण)

DNA को उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे उसके दोनों पूरक रज्जुक अलग हो जाते हैं।

सामान्य PCR में यह तापमान लगभग 94–95°C होता है।

2. Annealing (प्राइमर का जुड़ना)

तापमान कम करने पर प्राइमर DNA के पूरक अनुक्रमों से जुड़ते हैं।

प्राइमर का जुड़ने वाला तापमान उनके अनुक्रम और प्रयोग की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। सामान्यतः यह लगभग 50–65°C की सीमा में हो सकता है।

3. Extension (विस्तारण)

DNA Polymerase प्राइमर के सिरों से नए DNA रज्जुक का निर्माण करता है।

Taq Polymerase जैसे ऊष्मा-सहिष्णु एंजाइम इस प्रक्रिया में उपयोग किए जाते हैं। सामान्यतः विस्तारण लगभग 72°C पर किया जाता है।

इन तीनों चरणों को कई बार दोहराने से इच्छित DNA खंड की प्रतियों की संख्या तेजी से बढ़ती है।

याद रखने का आसान तरीका:

Denaturation → Annealing → Extension

PCR का महत्व

  1. रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों के DNA की पहचान।
  2. आनुवंशिक रोगों के निदान में सहायता।
  3. DNA फिंगरप्रिंटिंग।
  4. वैज्ञानिक अनुसंधान में DNA का प्रवर्धन।
  5. जैव प्रौद्योगिकी में DNA खंडों की जाँच और विश्लेषण।

जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस (Gel Electrophoresis)

जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस एक प्रयोगशाला तकनीक है जिसका उपयोग DNA खंडों को उनके आकार के आधार पर अलग करने के लिए किया जाता है।

DNA पर फॉस्फेट समूहों के कारण ऋणात्मक आवेश होता है। इसलिए विद्युत क्षेत्र में DNA खंड धनात्मक इलेक्ट्रोड की ओर गति करते हैं।

एगारोज जेल (Agarose Gel) का उपयोग DNA खंडों को अलग करने के लिए सामान्यतः किया जाता है।

जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस की कार्यविधि

  1. DNA नमूने को जेल के कुओं में डाला जाता है।
  2. जेल पर विद्युत क्षेत्र लगाया जाता है।
  3. DNA खंड धनात्मक इलेक्ट्रोड की ओर बढ़ते हैं।
  4. छोटे DNA खंड सामान्यतः बड़े खंडों की तुलना में अधिक दूरी तय करते हैं।
  5. उपयुक्त रंग या फ्लोरोसेंट डाई की सहायता से DNA बैंड देखे जाते हैं।

DNA बैंड को अलग करने के बाद इच्छित DNA खंड को जेल से काटकर निकाला जा सकता है। इस प्रक्रिया को Elution (एल्यूशन) कहते हैं।

जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस का महत्व

  • DNA खंडों को अलग करना।
  • PCR उत्पादों की जाँच करना।
  • DNA खंडों के अनुमानित आकार की तुलना करना।
  • इच्छित DNA खंड को अलग करके आगे के प्रयोगों में उपयोग करना।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण: जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस में DNA ऋणात्मक से धनात्मक इलेक्ट्रोड की ओर गति करता है।

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बायोरिएक्टर (Bioreactor)

बायोरिएक्टर एक बड़ा पात्र या प्रणाली है जिसमें सूक्ष्मजीवों, कोशिकाओं या जैविक घटकों का उपयोग करके नियंत्रित परिस्थितियों में उपयोगी उत्पादों का उत्पादन किया जाता है।

इसमें तापमान, pH, ऑक्सीजन की उपलब्धता, मिश्रण और पोषक पदार्थों जैसी परिस्थितियों को नियंत्रित किया जाता है।

बायोरिएक्टर का उपयोग एंजाइम, चिकित्सीय प्रोटीन, टीके और अन्य जैविक उत्पादों के औद्योगिक उत्पादन में किया जा सकता है।

बायोरिएक्टर के प्रमुख प्रकार

1. Stirred-Tank Bioreactor (मिश्रित टैंक बायोरिएक्टर)

इसमें एक मिक्सर या इंपेलर की सहायता से माध्यम को मिलाया जाता है। इससे पोषक पदार्थों और ऑक्सीजन का वितरण बेहतर हो सकता है।

2. Sparged Stirred-Tank Bioreactor (वायु प्रवाहित मिश्रित टैंक बायोरिएक्टर)

इसमें मिश्रण के साथ माध्यम में वायु या अन्य उपयुक्त गैस प्रवाहित की जाती है। इससे ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है।

बायोरिएक्टर के प्रमुख घटक

  • मिश्रण के लिए इंपेलर।
  • ऑक्सीजन या वायु पहुँचाने की व्यवस्था।
  • तापमान नियंत्रित करने की प्रणाली।
  • pH मापने और नियंत्रित करने की व्यवस्था।
  • पोषक माध्यम।
  • नमूना लेने की व्यवस्था।
  • गैस निकास तथा अन्य नियंत्रण उपकरण।

बायोरिएक्टर का महत्व

बायोरिएक्टर में जैविक उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है। इससे उत्पादन की परिस्थितियों को नियंत्रित रखना और उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखना आसान होता है।

डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग (Downstream Processing)

जैविक उत्पाद बनने के बाद उसे अलग करना, शुद्ध करना और उपयोग के लिए तैयार करना आवश्यक होता है। इन प्रक्रियाओं को सामूहिक रूप से डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग कहा जाता है।

उत्पाद के प्रकार के अनुसार इसमें कोशिकाओं को अलग करना, प्रोटीन का निष्कर्षण, शुद्धीकरण, गुणवत्ता परीक्षण और आवश्यक पैकेजिंग शामिल हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि किसी बायोरिएक्टर में इंसुलिन का उत्पादन किया गया है, तो प्राप्त उत्पाद को उपयुक्त विधियों से शुद्ध करके उसकी गुणवत्ता तथा सुरक्षा की जाँच की जाती है।

डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग के प्रमुख चरण

  1. उत्पाद या कोशिकाओं का पृथक्करण।
  2. उत्पाद का निष्कर्षण।
  3. शुद्धीकरण।
  4. गुणवत्ता और जैविक सक्रियता की जाँच।
  5. उपयुक्त पैकेजिंग और भंडारण।

महत्वपूर्ण: जैविक उत्पादों के लिए डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग आवश्यक है, क्योंकि अंतिम उत्पाद की शुद्धता, सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होती है।

Biotechnology: Principles and Processes — महत्वपूर्ण अंतर

(A) Exonuclease और Endonuclease में अंतर

ExonucleaseEndonuclease
DNA के सिरों से न्यूक्लियोटाइड हटाता है।DNA रज्जुक के भीतर बंधों को काटता है।
सिरों से क्रमिक निष्कासन कर सकता है।विशिष्ट एंजाइम DNA के भीतर निश्चित अनुक्रमों पर काट सकता है।
DNA के सिरों पर कार्य करता है।DNA के आंतरिक भाग में कार्य करता है।

(B) Sticky Ends और Blunt Ends में अंतर

Sticky EndsBlunt Ends
DNA काटने पर छोटे एकल-रज्जुक वाले उभरे हुए सिरे बनते हैं।दोनों DNA रज्जुक लगभग एक ही स्थान पर कटते हैं।
पूरक अनुक्रमों से हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं।इनमें एकल-रज्जुक वाला उभरा हुआ सिरा नहीं होता।
उपयुक्त पूरक सिरों को जोड़ने में सहायक होते हैं।इन्हें जोड़ने के लिए भी DNA Ligase का उपयोग किया जा सकता है।

(C) PCR और Gel Electrophoresis में अंतर

PCRGel Electrophoresis
DNA की प्रतियों की संख्या बढ़ाता है।DNA खंडों को अलग करता है।
DNA Polymerase का उपयोग होता है।विद्युत क्षेत्र और जेल का उपयोग होता है।
DNA Amplification की तकनीक है।DNA Separation की तकनीक है।

(D) Cloning और Gene Expression में अंतर

CloningGene Expression
इच्छित DNA की प्रतियाँ बनाने पर केंद्रित है।जीन से RNA या प्रोटीन बनने की प्रक्रिया है।
DNA की प्रतिकृति इसमें महत्वपूर्ण होती है।Transcription और आवश्यकता के अनुसार Translation महत्वपूर्ण होते हैं।
इससे DNA खंड की अनेक प्रतियाँ प्राप्त की जा सकती हैं।इससे जीन का कार्यात्मक उत्पाद बन सकता है।

महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्दावली (Important Terminology)

English Termहिंदी अर्थ
Biotechnologyजैव प्रौद्योगिकी
Genetic Engineeringआनुवंशिक अभियांत्रिकी
Recombinant DNAपुनर्संयोजित DNA
Restriction Enzymeप्रतिबंधन एंजाइम
Restriction Endonucleaseप्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज
DNA LigaseDNA जोड़ने वाला एंजाइम
DNA PolymeraseDNA बनाने वाला एंजाइम
Plasmidप्लास्मिड
Cloning Vectorक्लोनिंग वाहक
Origin of Replicationप्रतिकृति प्रारंभ स्थल
Selectable Markerचयन योग्य चिह्न
Host Cellपरपोषी कोशिका
Transformationरूपांतरण
PCRपॉलिमरेज चेन रिएक्शन
Denaturationविकृतिकरण
Annealingप्राइमर का जुड़ना
ExtensionDNA रज्जुक का विस्तारण
Gel Electrophoresisजेल विद्युतकणसंचलन
Elutionजेल से DNA खंड निकालना
Bioreactorजैव अभिक्रियक
Downstream Processingउत्पाद का पृथक्करण एवं शुद्धीकरण
Palindromic Sequenceपैलिंड्रोमिक अनुक्रम
cDNAपूरक DNA
Taq Polymeraseऊष्मा-सहिष्णु DNA Polymerase

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न (Important Short Answer Questions)

प्रश्न 1. जैव प्रौद्योगिकी क्या है?

उत्तर: जीवों, कोशिकाओं, एंजाइमों या जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग करके मनुष्य के लिए उपयोगी उत्पाद बनाने की तकनीक को जैव प्रौद्योगिकी कहते हैं।

प्रश्न 2. पुनर्संयोजित DNA क्या है?

उत्तर: अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त DNA खंडों को जोड़कर बनाया गया DNA अणु पुनर्संयोजित DNA कहलाता है।

प्रश्न 3. Restriction Enzyme क्या है?

उत्तर: वह एंजाइम जो DNA के विशिष्ट न्यूक्लियोटाइड अनुक्रमों को पहचानकर उन्हें काटता है, प्रतिबंधन एंजाइम कहलाता है।

प्रश्न 4. DNA Ligase का क्या कार्य है?

उत्तर: DNA Ligase DNA खंडों को फॉस्फोडाइएस्टर बंध बनाकर जोड़ता है।

प्रश्न 5. प्लास्मिड क्या है?

उत्तर: प्लास्मिड सामान्यतः बैक्टीरिया में पाया जाने वाला छोटा DNA अणु है, जो मुख्य गुणसूत्रीय DNA से अलग प्रतिकृति बना सकता है।

प्रश्न 6. Cloning Vector क्या है?

उत्तर: क्लोनिंग वाहक वह DNA अणु है जो इच्छित DNA खंड को परपोषी कोशिका में पहुँचाने और उसकी प्रतिकृति बनाने में सहायता करता है।

प्रश्न 7. PCR का पूरा नाम क्या है?

उत्तर: PCR का पूरा नाम Polymerase Chain Reaction है। इसका उपयोग DNA के विशिष्ट खंड की अनेक प्रतियाँ बनाने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 8. PCR में Taq Polymerase का उपयोग क्यों किया जाता है?

उत्तर: Taq Polymerase उच्च तापमान सहन कर सकता है और PCR के दौरान DNA के नए रज्जुक बनाने में सहायता करता है।

प्रश्न 9. Gel Electrophoresis क्या है?

उत्तर: यह एक तकनीक है जिसमें विद्युत क्षेत्र की सहायता से DNA खंडों को उनके आकार के आधार पर अलग किया जाता है।

प्रश्न 10. Elution क्या है?

उत्तर: जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस के बाद जेल से इच्छित DNA खंड को निकालने की प्रक्रिया एल्यूशन कहलाती है।

प्रश्न 11. Bioreactor क्या है?

उत्तर: बायोरिएक्टर एक नियंत्रित पात्र है जिसमें सूक्ष्मजीवों या कोशिकाओं की सहायता से उपयोगी जैविक उत्पादों का उत्पादन किया जाता है।

प्रश्न 12. Downstream Processing क्या है?

उत्तर: जैविक उत्पाद बनने के बाद उसके पृथक्करण, शुद्धीकरण, गुणवत्ता परीक्षण और उपयोग के लिए तैयार करने की प्रक्रियाओं को डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग कहते हैं।

प्रश्न 13. पैलिंड्रोमिक DNA अनुक्रम क्या है?

उत्तर: ऐसा DNA अनुक्रम जिसे दोनों पूरक रज्जुकों पर 5′ से 3′ दिशा में पढ़ने पर समान अनुक्रम मिलता है, पैलिंड्रोमिक अनुक्रम कहलाता है।

प्रश्न 14. Selectable Marker का क्या कार्य है?

उत्तर: चयन योग्य चिह्न रूपांतरित कोशिकाओं की पहचान या चयन करने में सहायता करता है।

प्रश्न 15. सक्षम परपोषी कोशिकाएँ क्या हैं?

उत्तर: ऐसी कोशिकाएँ जो बाहरी DNA को ग्रहण करने में सक्षम होती हैं, सक्षम परपोषी कोशिकाएँ कहलाती हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1. पुनर्संयोजित DNA तकनीक के प्रमुख चरणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

पुनर्संयोजित DNA तकनीक वह विधि है जिसमें अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त DNA खंडों को जोड़कर इच्छित DNA अणु बनाया जाता है।

इसके प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं:

  1. DNA का पृथक्करण: इच्छित जीन वाले जीव से DNA अलग किया जाता है।
  2. DNA का कटाव: प्रतिबंधन एंजाइम की सहायता से इच्छित DNA खंड और वाहक DNA को काटा जाता है।
  3. DNA का संयोजन: DNA Ligase की सहायता से इच्छित DNA खंड को वाहक DNA से जोड़ा जाता है।
  4. परपोषी कोशिका में प्रवेश: पुनर्संयोजित DNA को उपयुक्त परपोषी कोशिका में पहुँचाया जाता है।
  5. चयन और पहचान: इच्छित DNA रखने वाली कोशिकाओं की पहचान की जाती है।
  6. क्लोनिंग: उपयुक्त परिस्थितियों में कोशिकाओं को विकसित करके DNA की अनेक प्रतियाँ बनाई जाती हैं।
  7. उत्पाद प्राप्त करना: आवश्यकता के अनुसार जीन की अभिव्यक्ति कराकर उपयोगी उत्पाद बनाया और शुद्ध किया जाता है।

इस तकनीक का उपयोग चिकित्सा, कृषि, आनुवंशिक अनुसंधान तथा औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी में किया जाता है।

प्रश्न 2. PCR की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

PCR अर्थात Polymerase Chain Reaction एक तकनीक है जिसके द्वारा DNA के किसी विशिष्ट खंड की अनेक प्रतियाँ बनाई जाती हैं।

इसके तीन प्रमुख चरण हैं:

  1. Denaturation: DNA को उच्च तापमान पर गर्म करके उसके दोनों रज्जुक अलग किए जाते हैं।
  2. Annealing: तापमान कम करके प्राइमर को DNA के पूरक अनुक्रमों से जोड़ा जाता है।
  3. Extension: DNA Polymerase की सहायता से नए DNA रज्जुक बनाए जाते हैं।

इन चरणों को बार-बार दोहराने से इच्छित DNA खंड की प्रतियाँ तेजी से बढ़ती हैं। PCR का उपयोग रोगों के निदान, DNA विश्लेषण, फॉरेंसिक विज्ञान और आनुवंशिक अनुसंधान में होता है।

प्रश्न 3. क्लोनिंग वाहक की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

क्लोनिंग वाहक DNA का ऐसा अणु है जो इच्छित DNA खंड को परपोषी कोशिका में पहुँचाता है तथा उसकी प्रतिकृति बनाने में सहायता करता है।

एक अच्छे क्लोनिंग वाहक में निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं:

  1. Origin of Replication (ori): DNA की प्रतिकृति शुरू होने का स्थान।
  2. Selectable Marker: वाहक प्राप्त करने वाली कोशिकाओं की पहचान में सहायक।
  3. Cloning Site: विदेशी DNA जोड़ने का उपयुक्त स्थान।
  4. उपयुक्त आकार: DNA को संभालने और कोशिका में प्रवेश कराने में सहायक।
  5. स्थिरता: उपयुक्त परिस्थितियों में वाहक का परपोषी कोशिका के भीतर बना रहना।

प्लास्मिड और बैक्टीरियोफेज DNA क्लोनिंग वाहकों के उदाहरण हैं।

प्रश्न 4. बायोरिएक्टर की संरचना और कार्यों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

बायोरिएक्टर एक नियंत्रित पात्र है जिसमें सूक्ष्मजीवों या कोशिकाओं की सहायता से उपयोगी जैविक उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है।

इसके प्रमुख घटक मिश्रण प्रणाली, तापमान नियंत्रण, pH नियंत्रण, वायु या ऑक्सीजन की आपूर्ति, पोषक माध्यम तथा नमूना लेने की व्यवस्था हैं।

बायोरिएक्टर के प्रमुख कार्य हैं:

  1. सूक्ष्मजीवों या कोशिकाओं के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करना।
  2. तापमान और pH को नियंत्रित करना।
  3. पोषक पदार्थों तथा ऑक्सीजन का उचित वितरण करना।
  4. उत्पादन प्रक्रिया को नियंत्रित रखना।
  5. जैविक उत्पादों के बड़े पैमाने पर निर्माण में सहायता करना।

Stirred-Tank Bioreactor इसका एक प्रमुख उदाहरण है।

प्रश्न 5. जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस की प्रक्रिया और महत्व समझाइए।

उत्तर:

जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस एक प्रयोगशाला तकनीक है जिसमें विद्युत क्षेत्र की सहायता से DNA खंडों को उनके आकार के आधार पर अलग किया जाता है।

DNA नमूनों को एगारोज जेल के कुओं में रखा जाता है। विद्युत क्षेत्र लगाने पर ऋणात्मक आवेश वाला DNA धनात्मक इलेक्ट्रोड की ओर गति करता है। सामान्यतः छोटे DNA खंड जेल में बड़े खंडों की तुलना में अधिक दूरी तक जाते हैं।

DNA खंडों को उपयुक्त डाई की सहायता से देखा जा सकता है। आवश्यक होने पर इच्छित DNA खंड को जेल से निकालकर आगे के प्रयोगों में उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया को एल्यूशन कहते हैं।

इस तकनीक का उपयोग PCR उत्पादों की जाँच, DNA खंडों के आकार की तुलना और DNA शुद्धीकरण में किया जाता है।

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त्वरित रिवीजन नोट्स (Quick Revision Notes)

परीक्षा से पहले इन तथ्यों को अवश्य दोहराएँ:

  • जैव प्रौद्योगिकी में जीवों या जैविक प्रक्रियाओं से उपयोगी उत्पाद बनाए जाते हैं।
  • आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के दो प्रमुख आधार Genetic Engineering और Bioprocess Engineering हैं।
  • Recombinant DNA अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त DNA खंडों को जोड़कर बनाया जाता है।
  • Restriction Endonuclease DNA को विशिष्ट अनुक्रमों पर काटता है।
  • DNA Ligase DNA खंडों को जोड़ता है।
  • DNA Polymerase DNA की प्रतिकृति बनाने में सहायता करता है।
  • Plasmid एक सामान्य क्लोनिंग वाहक है।
  • ori DNA प्रतिकृति प्रारंभ होने का स्थान है।
  • Selectable Marker रूपांतरित कोशिकाओं के चयन में सहायता करता है।
  • PCR में Denaturation, Annealing और Extension चरण होते हैं।
  • Taq Polymerase उच्च तापमान सहन करने वाला DNA Polymerase है।
  • Gel Electrophoresis DNA खंडों को अलग करता है।
  • Elution में जेल से इच्छित DNA खंड निकाला जाता है।
  • Bioreactor नियंत्रित परिस्थितियों में जैविक उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करता है।
  • Downstream Processing में उत्पाद का पृथक्करण, शुद्धीकरण और गुणवत्ता परीक्षण शामिल हैं।

बिहार बोर्ड परीक्षा 2027 के लिए महत्वपूर्ण तैयारी सुझाव

इस अध्याय की तैयारी करते समय केवल परिभाषाएँ याद करना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को प्रक्रियाओं के क्रम, एंजाइमों के कार्य और वैज्ञानिक शब्दावली को भी समझना चाहिए।

विशेष रूप से निम्नलिखित विषयों पर ध्यान दें:

  1. Recombinant DNA Technology के चरण।
  2. Restriction Endonuclease और DNA Ligase के कार्य।
  3. Palindromic DNA Sequence तथा Sticky Ends।
  4. Cloning Vector और उसके प्रमुख घटक।
  5. PCR के तीन चरण।
  6. Gel Electrophoresis और Elution।
  7. Bioreactor की संरचना तथा कार्य।
  8. Downstream Processing का महत्व।

महत्वपूर्ण: ये अभ्यास के लिए चुने गए प्रमुख विषय हैं, न कि बिहार बोर्ड द्वारा घोषित प्रश्नों की गारंटी। परीक्षा की तैयारी के लिए अपने नवीनतम आधिकारिक पाठ्यक्रम और उपलब्ध मॉडल पेपर से भी मिलान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. Biotechnology: Principles and Processes किस कक्षा का अध्याय है?

यह कक्षा 12 जीव विज्ञान का अध्याय है, जिसमें जैव प्रौद्योगिकी के सिद्धांतों, उपकरणों और प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।

Q2. Recombinant DNA Technology क्या है?

यह ऐसी तकनीक है जिसमें अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त DNA खंडों को जोड़कर नया DNA अणु बनाया जाता है।

Q3. PCR का मुख्य कार्य क्या है?

PCR का मुख्य कार्य DNA के किसी विशिष्ट खंड की अनेक प्रतियाँ बनाना है।

Q4. Restriction Enzyme और DNA Ligase में क्या अंतर है?

Restriction Enzyme DNA को विशिष्ट स्थानों पर काटता है, जबकि DNA Ligase DNA खंडों को जोड़ता है।

Q5. Cloning Vector के दो उदाहरण क्या हैं?

प्लास्मिड और बैक्टीरियोफेज DNA क्लोनिंग वाहकों के उदाहरण हैं।

Q6. Gel Electrophoresis में DNA किस दिशा में गति करता है?

DNA ऋणात्मक आवेशित होने के कारण विद्युत क्षेत्र में धनात्मक इलेक्ट्रोड की ओर गति करता है।

Q7. Bioreactor का क्या उपयोग है?

बायोरिएक्टर का उपयोग नियंत्रित परिस्थितियों में सूक्ष्मजीवों या कोशिकाओं से उपयोगी जैविक उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए किया जाता है।

Q8. Downstream Processing क्यों आवश्यक है?

जैविक उत्पाद को अलग करने, शुद्ध करने और उसकी गुणवत्ता तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग आवश्यक है।

निष्कर्ष (Conclusion)

Biotechnology: Principles and Processes कक्षा 12 जीव विज्ञान का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें DNA के पृथक्करण, प्रतिबंधन एंजाइम, क्लोनिंग वाहक, PCR, जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस, बायोरिएक्टर तथा डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग जैसी प्रमुख अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है।

यदि विद्यार्थी प्रत्येक तकनीक का कार्य, उसके चरण और संबंधित वैज्ञानिक शब्दों को समझकर तैयारी करें, तो इस अध्याय के वस्तुनिष्ठ, लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों को हल करना अधिक आसान हो सकता है।

विद्यार्थियों के लिए सुझाव: इन नोट्स को पढ़ने के बाद प्रत्येक विषय की परिभाषा अपने शब्दों में लिखने और PCR, पुनर्संयोजित DNA तकनीक तथा जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस के सरल चित्र बनाने का अभ्यास करें।

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